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Sunday, December 6, 2020

वजह--लघुकथा

 "बहुत उदास लग रही हो आज, क्या हो गया?, राजेश ने आखिर पूछ ही लिया. अमूमन बेहद प्रसन्न दिखने वाली धर्मपत्नी सुबह से ही गंभीर और उदास नजर आ रही थी. 

उधर से कोई जवाब नहीं आया लेकिन बेटी के सामान की पैकिंग चलती रही.

राजेश सोच में पड़ गया, कोई तो वजह होगी लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था. उसने सामने मेज पर पड़े अखबार को उठाया और दुबारा पढ़ने बैठ गया. अचानक उसकी निगाह उस खबर पर पड़ी जिसे उसने सबेरे नजरअंदाज कर दिया था "कोविड के चलते बंद कालेज पुनः खुलेंगे".

वह उठा और धर्मपत्नी के पास खड़ा होकर कहने लगा "अरे पहले भी तो बेटी छुट्टियों में आती थी और फिर चली जाती थी, फिर इस बार इतनी उदासी क्यों?

धर्मपत्नी ने अपना उदास चेहरा उठाया और धीरे से कहा "इस बार बहुत ज्यादा समय साथ ही रह गयी थी, मैंने तो सोचा भी नहीं था कि कभी इतने दिन फिर से साथ रहने को मिलेगा".