"अरे कल कहाँ रह गया था तू, आजकल बहुत नागा करने लगा है", जलती निगाह से देखते हुए सोहन ने उसको घुड़का|
"कुछ जरुरी काम आ गया था मालिक, आगे ध्यान रखूँगा", कहकर उसने खरहरा उठाया और दरवाजा साफ़ करने लगा|
"अच्छा तेरे परीक्षा का क्या हुआ, कुछ निकला उसका", व्यंग से सोहन ने उसे टोका|
"अभी नहीं निकला है मालिक", कहकर वह वापस काम में लग गया|
"इन लोगों को भी कलक्टर बनने का सपना दिखता है आजकल, पता नहीं इ सब काम कौन करेगा", सोहन बड़बड़ाते हुए खलिहान की तरफ निकल गया|
उसने एक मिनट के लिए खरहरा रोका और जेब में पड़े हुए साक्षात्कार के पत्र को एक बार फिर से टटोला| उसे स्पर्श करते ही अपने संघर्ष उसको याद आ गए| एक जंग लगी चाभी मिटटी से झांकती नजर आयी तो उसने उसे उठा लिया| ऐसी ही चाभी तो अभी उसके जेब में भी है जिससे वह अपने पुरखों के बंद सपनों को खोल सकेगा, सोचते हुए उसके हाथ अब जल्दी जल्दी चल रहे थे|
"कुछ जरुरी काम आ गया था मालिक, आगे ध्यान रखूँगा", कहकर उसने खरहरा उठाया और दरवाजा साफ़ करने लगा|
"अच्छा तेरे परीक्षा का क्या हुआ, कुछ निकला उसका", व्यंग से सोहन ने उसे टोका|
"अभी नहीं निकला है मालिक", कहकर वह वापस काम में लग गया|
"इन लोगों को भी कलक्टर बनने का सपना दिखता है आजकल, पता नहीं इ सब काम कौन करेगा", सोहन बड़बड़ाते हुए खलिहान की तरफ निकल गया|
उसने एक मिनट के लिए खरहरा रोका और जेब में पड़े हुए साक्षात्कार के पत्र को एक बार फिर से टटोला| उसे स्पर्श करते ही अपने संघर्ष उसको याद आ गए| एक जंग लगी चाभी मिटटी से झांकती नजर आयी तो उसने उसे उठा लिया| ऐसी ही चाभी तो अभी उसके जेब में भी है जिससे वह अपने पुरखों के बंद सपनों को खोल सकेगा, सोचते हुए उसके हाथ अब जल्दी जल्दी चल रहे थे|
No comments:
Post a Comment