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Friday, July 11, 2014

अंतिम संस्कार--

" मेरे पास समय बहुत कम है , डाक्टर ने बता दिया है कि कैंसर अपने आखिरी स्टेज में है , प्लीज बेटे को बुला लो अब" | पापा की दर्द भरी आवाज सुनकर वो अपने आप को रोक नहीं सकी , आँसू बेशाख्ता आँखों से बह निकले | माँ तो जैसे जड़ हो गयी थी , सिर्फ सूनी सूनी आँखों से कभी पापा को , तो कभी उसे देखती रहती |
कैसे बताये उनको , कल ही तो उसने फोन किया था भाई को | पूरी बात सुनने से पहले ही बोल पड़ा " मैं बार बार नहीं आ सकता वहां , अभी १५ दिन पहले ही तो आया हूँ | इतनी छुट्टी नहीं मिल सकती मुझे , और हाँ पैसों की जरुरत हो तो मुझे बता देना , भेज दूंगा"|
रात बीती , सुबह हुई | पापा नहीं रहे | हस्पताल के सभी बिल चुकाने के बाद , पापा का पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से घर ले आई | और भाई को उसने मैसेज कर दिया " तुम्हारे भेजे हुए पैसों से हस्पताल के बिल चुकाने के बाद करीब छः हज़ार बच गए थे , तुम्हारे अकॉउंट में डलवा दूंगी | और हाँ , अंतिम संस्कार तो मैं करवा दूंगी , अगर छुट्टी मिल जाये तो ब्राह्मणों को भोजन कराने तेरहवीं में आ जाना"|  
तलाश -- पूनमजी की कहानी का अगला पार्ट--
दीपिका अपराधबोध से भर गयी थी , जिस सौरभ को उसने क्या , क्या नहीं कहा था , उसी ने आड़े वक़्त में निस्वार्थ भाव से उसकी मदद की थी | लेकिन अब वो उसका फोन ही नहीं उठा रहा था , कैसे माफ़ी मांगे अपने दुर्व्यवहार की , कैसे उस बोझ को उतारे अपने सर से | कुछ समझ नहीं आ रहा था उसे |
अचानक उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी | आखिर ये टेक्नोलॉजी कब काम आएगी उसने सोचा और उसने फेसबुक पर एक नए नाम से अपना प्रोफाइल बनाया और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दिया सौरभ को | कुछ देर बाद नोटिफिकेशन आया " फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्टेड"| अब लाइक , कमेंट्स का सिलसिला चल पड़ा , धीरे धीरे चैटिंग बढ़ने लगी और दीपिका अपने बारे में उसे सब कुछ बताने लगी | कहीं ये दीपिका तो नहीं , सौरभ एक पल को चौंका , लेकिन नाम , पता , उम्र सब अलग थे तो उसने इसे एक कोइन्सिडेंस समझा |
फिर वो घड़ी भी आ गयी जब सौरभ ने मिलने की बात की | दीपिका को तो इसी मौके का इंतज़ार था , अगले दिन शाम को कैफ़े कॉफ़ी डे में मिलना तंय हुआ | सौरभ बहुत एक्ससाईटेड था तो दीपिका भी नर्वस कि पता नहीं वो कैसे रियेक्ट करे |

Thursday, July 10, 2014

अपने

" क्या बात है वर्माजी , बड़े खुश नज़र आ रहे हैं आप , कोई लाटरी तो नहीं लग गयी इस उम्र में" | "
नहीं भाई , दरअसल अख़बार में खबर थी कि एक वृद्धाश्रम बन रहा है अपने शहर में , अब कम से कम बाक़ी जिंदगी तो अपनों में गुजरेगी "|

दादी

दादी ने सब सुन लिया था कि दीपिका किससे बात कर रही है | अब वो सोच में पड़ गयी कि कैसे समझाए दीपिका को , वो तो कुछ दिन की मेहमान हैं , जिंदगी तो बच्ची की पूरी पड़ी है | उन्होंने उसके सर पे हाँथ फेरते हुए प्यार से पूछा " बेटा ये बता कि मैं कितने दिन जीने वाली हूँ , आखिर तुम्हे तो अपनी जिंदगी बितानी है न | तो मेरे लिए इस तरह अगर तू लड़कों को दुत्कारते रहेगी तो शायद मैं चिंता और दुःख में समय से पहले ही चली जाउंगी | चल मुझसे एक वादा कर कि अब और किसी से तू इस तरह का वर्ताव नहीं करेगी |
दीपिका ने हाँ में सर हिलाते हुए दादी कि गोद में सर छुपा लिया और दादी भी उसे प्यार से सहलाती रहीं | ये अलग बात थी कि उसके इरादे नहीं बदले थे |

Monday, July 7, 2014

पिज़्ज़ा

"पैसे पेड़ पर नहीं उगते बहादुर , अभी नहीं दे सकती मैं"|
बहादुर मुह लटकाये सोचने लगा कि अब बीबी के इलाज़ के पैसे कहाँ से लाए |
तभी बेटे की आवाज आई "क्या मम्मी आपने वेज पिज़्ज़ा मंगा दिया , आप भूल गयीं कि मैंने नान वेज पिज़्ज़ा के लिए कहा था | दूसरा आर्डर करदो ना प्लीज"|
ठीक है बेटा , बहादुर को बोल दो , लेता आएगा मार्केट से | 

Sunday, July 6, 2014

भूख़--

"अरे बेटा, कैसे खा लिया तुमने उस ठेले से समोसा और पानी पूरी, तुम तो जानते ही हो कि कितने गंदे हाथ होते हैं उनके और कैसा पानी और तेल इस्तेमाल करते हैं वो लोग", मम्मी परेशान थीं और पापा चिंतित|
तब तक बड़े भाई ने भी टोक दिया " तुमसे ये उम्मीद नहीं थी, तुम तो साइंस के छात्र हो"|
"लेकिन मम्मी, मुझे भूख़ लगी थी"|
अब सब खामोश थे|

Saturday, July 5, 2014

नज़र

दोस्तों के साथ मूवी देखकर और लंच करके लौटी थीं वो | घर में घुसते ही माँ ने कहा " अरे अपने शर्मा अंकल आए हैं , ड्राइंग रूम में जा के नमस्ते तो कर ले "|
ठीक है माँ , मिल लेती हूँ जा के , जरा दुपट्टा तो डाल लूँ |