घर के अंदर भी हालत ख़राब थी दुर्गन्ध से, बाहर निकलते समय तो सब नाक पर रुमाल रख कर ही निकल रहे थे| बारिश हुई थी और बाहर की नाली ओवरफ्लो हो गयी थी, उसमे बहता हुआ पुरे कॉलोनी का कचड़ा, पॉलिथीन और मल मूत्र सब बाहर आ रहा था|
" पापा, साफ़ कराईये न, जीना दूभर हो गया है और कल दोस्तों को घर भी बुलाया है ", बेटे ने थोड़ा तेज आवाज़ में कहा और नाक ढँकते हुए निकल गया| शर्माजी ने एक बार सोचा कि खुद ही साफ़ करलें, लेकिन जैसे ही बाहर निकले, हिम्मत जवाब दे गयी|
फिर याद आई मलिन बस्ती के लड़कों की जो सफाई करते थे| उनको बुलाया और हिम्मत जुटाकर खड़े रहे जब तक नाली साफ़ नहीं हो गयी| सब साफ़ करके दोनों लड़के आये और कुछ कहते उसके पहले ही शर्माजी ने ५०० का नोट निकालकर पकड़ा दिया और अपने हाँथ जोड़ दिए|
लड़को के मुह में " २०० दे दीजिये साहब " अँटका ही रह गया और वो अचंभित शर्माजी को देखने लगे| घर के अंदर से देख रही उनकी पत्नी के हाँथ भी, पता नहीं किसके सम्मान में जुड़ गए|
" पापा, साफ़ कराईये न, जीना दूभर हो गया है और कल दोस्तों को घर भी बुलाया है ", बेटे ने थोड़ा तेज आवाज़ में कहा और नाक ढँकते हुए निकल गया| शर्माजी ने एक बार सोचा कि खुद ही साफ़ करलें, लेकिन जैसे ही बाहर निकले, हिम्मत जवाब दे गयी|
फिर याद आई मलिन बस्ती के लड़कों की जो सफाई करते थे| उनको बुलाया और हिम्मत जुटाकर खड़े रहे जब तक नाली साफ़ नहीं हो गयी| सब साफ़ करके दोनों लड़के आये और कुछ कहते उसके पहले ही शर्माजी ने ५०० का नोट निकालकर पकड़ा दिया और अपने हाँथ जोड़ दिए|
लड़को के मुह में " २०० दे दीजिये साहब " अँटका ही रह गया और वो अचंभित शर्माजी को देखने लगे| घर के अंदर से देख रही उनकी पत्नी के हाँथ भी, पता नहीं किसके सम्मान में जुड़ गए|
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