विदाई समारोह में सारा कार्यालय इकठ्ठा था, शर्माजी ३२ साल की सेवा पूर्ण करके सेवानिवृत्त हो रहे थे| अपने पुरे कार्यकाल में उन्होंने अपनी ईमानदारी और सदाशयता बरक़रार रखी थी|
समारोह में उन्होंने सबसे पहले खुद बोलने की अनुमति मांगी और बोलना प्रारम्भ किया " मुझे पता है कि आज के दिन आप लोग मेरे बारे में बहुत अच्छा बोलेंगे क्योंकि यही रिवाज़ है| लेकिन ये मेरी दिली इच्छा है कि आप अगर मेरे बारे में कहें तो वही कहें जो मेरे लिए आपके दिल में हमेशा से रहा है| इस कार्यालय में, एक चायवाले को छोड़कर, जिसके पूरे पैसे मैंने हमेशा चुकता किया, शायद ही किसी ने मुझे समझदार समझा| मुझे कत्तई बुरा नहीं लगेगा अगर आप मेरे बारे में सच कहेंगे, लेकिन कृपया आज के दिन झूठ मत कहियेगा "|
एक सन्नाटा पसर गया था, ऐसे आईने की उम्मीद किसी को नहीं थी|
समारोह में उन्होंने सबसे पहले खुद बोलने की अनुमति मांगी और बोलना प्रारम्भ किया " मुझे पता है कि आज के दिन आप लोग मेरे बारे में बहुत अच्छा बोलेंगे क्योंकि यही रिवाज़ है| लेकिन ये मेरी दिली इच्छा है कि आप अगर मेरे बारे में कहें तो वही कहें जो मेरे लिए आपके दिल में हमेशा से रहा है| इस कार्यालय में, एक चायवाले को छोड़कर, जिसके पूरे पैसे मैंने हमेशा चुकता किया, शायद ही किसी ने मुझे समझदार समझा| मुझे कत्तई बुरा नहीं लगेगा अगर आप मेरे बारे में सच कहेंगे, लेकिन कृपया आज के दिन झूठ मत कहियेगा "|
एक सन्नाटा पसर गया था, ऐसे आईने की उम्मीद किसी को नहीं थी|
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