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Wednesday, January 25, 2017

कठिन फैसला--लघुकथा

"मैं उससे शादी नहीं कर सकती", उसने एक बार फिर से वही दुहराया जो वह माँ के सामने कह चुकी थी|
सुनकर पिता को अंदर ही अंदर काफी ख़ुशी भी हुई, आखिर उनकी बेटी में कोई कमी नहीं थी फिर वह क्यों ऐसे लड़के से शादी करे| लेकिन थोड़ा झटका भी लगा उनको, ऐसी उम्मीद नहीं थी उनको| कहाँ तो उन्होंने सोचा था कि वही कहेंगे कि इस लड़के से अब शादी मत करना और जमाने की परवाह तो बिलकुल मत करना|
"लेकिन बेटी, अगर यह दुर्घटना शादी के बाद होती तो क्या करती तुम", पिता ने फिर भी पूछा|
"तब शायद उसे अपने अपाहिज होने का इतना गम नहीं होता, लेकिन अब अगर मैं करती हूँ तो वह जीवन भर हीन भावना से उबर नहीं पायेगा", कहते हुए वह कमरे में घुस गयी|
इस कठिन फैसले को लेने में जो तकलीफ वह झेल रही थी, वह उनको दिखाना नहीं चाहती थी| 

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