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Thursday, March 29, 2018

मैडम प्लीज- लघुकथा

उसने अपने कदम एक बार फिर आगे बढ़ाए, लेकिन फिर रुक गया. आफिस की जल्दी थी, महीने का आखिरी हफ्ता था तो काम भी बहुत था. फिर वह वापस लौटा, किचेन की खुली हुई खिड़की से नजर आ रही उस महिला को उसने आज के पहले कभी नहीं देखा था. अब ऐसे मे क्या करे, उसे कह दे या नहीं, इसी कश्मकश मे वह खड़ा था.
किसी ने यहाँ खड़े देख लिया तो बखेड़ा हो जाएगा, आजकल वैसे भी बहुत खबरें आ रही हैं अखबार मे. एक बार फिर उसने किचेन की तरफ देखते हुए कदम आगे बढ़ाया. शायद उस महिला की नजर भी उसकी तरफ पड़ गई थी और अब उसे थोड़ी घबराहट भी होने लगी थी.
खैर किस किस को वह कहेगा, लोग जब खुद ही ख्याल नहीं रखते हैं तो वह करे भी तो क्या करे. घड़ी पर नजर पड़ी, देर होने और उसके बाद बास की जलती नजर सब दिमाग मे आ गया और वह सर झटक कर आगे चला.
बमुश्किल चार पाँच कदम चलने के बाद उसके कदम खुद ब खुद मुड़ गए और वह लपककर उस घर के पास पहुंचा. किचेन से आवाज तो आ रही थी लेकिन वह महिला नहीं दिख रही थी. आखिरकार उससे रहा नहीं गया और वह आवाज लगाने वाला ही था कि वह महिला खिड़की के सामने प्रकट हुई. वह गुस्से मे कुछ बोलती इसके पहले ही उसने हाथ जोड़े और ऊँची आवाज मे बोला "मैडम, प्लीज नल बंद कर दीजिए, ऐसे पानी मत बर्बाद कीजिए".
उस महिला ने चौंककर उसको देखा और नल बंद कर दिया. उसने घड़ी पर नजर डाली और बस पकड़ने के लिए दौड़ पड़ा.

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