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Friday, December 5, 2014

सपने की मौत--

प्लेटफार्म पर बैठे बैठे पुराना समय चलचित्र की तरह घूम रहा था मनोज के दिमाग में | काश पिता की बात मानी होती तो शायद ये दिन नहीं देखना पड़ता पर नौजवानी में दिल कहाँ दिमाग की सुनता है | उस समय तो जूनून सवार था फिल्मों में हीरो बनने का |
अच्छी शक्लसूरत तो थी ही , साथ में दोस्त भी ऐसे मिले जिन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी उसे चढ़ाने में | " तुम तो पक्का हीरो बनोगे , क्या टैलेंट है तुम्हारे अंदर " और भी जाने क्या क्या | फिर क्या था , माता पिता की बात अनसुनी करते हुए करते हुए एक दिन निकल गया मुंबई के लिए |
लगातार कई महीने धक्के खाए , पास की एक एक पाई जब ख़त्म हो गयी और भूख से पेट की अतड़ियां ऐठने लगीं तो घर वापस जाने के लिए स्टेशन पर आ गया | फिर पिता के कहे शब्द याद आये " कुछ ही दिन में वापस यहीं नज़र आओगे तुम" और उसने प्लेटफार्म पर खड़े यात्री से पूछा " साहब , सामान रखवा दूँ डिब्बे में "|  

Thursday, December 4, 2014

संघर्ष--

कई बार गिना बिल्लू ने , लेकिन कुल ६५ रुपये ही थे उसके पास | बेटे की असमय मौत ने उसे तोड़ दिया था , और एक बार फिर वो वापस प्लेटफार्म पर आ गया था | ढलती उम्र ,पोती के इलाज़ और चार जनों का पेट भरने के लिए पैसे की सख़्त जरुरत थी और बस इतनी सी कमाई , कुछ सोच नहीं पा रहा था वो |
न जाने कितनी देर यूँ ही सर झुकाये बैठा रहा बिल्लू , ट्रेनें गुजरती रहीं पटरियों से और ग़ुम होती रहीं सन्नाटे में |
फिर उसने मन को कड़ा किया और दूसरे प्लेटफार्म की ओर चलने की तैयारी करने लगा | उद्घोषणा जारी थी " यात्रीगण कृपया ध्यान दें , प्लेटफार्म न. ४ पर आने वाली ट्रेन अब प्लेटफार्म न. ६ पर आएगी "|

Wednesday, December 3, 2014

महिला सशक्तिकरण--

" क्या बात है सर , आजकल आप बहुत व्यस्त चल रहे हैं "|
" हाँ , आजकल व्यस्तता बढ़ गयी है , समय नहीं दे पा रहा पूरा , लेकिन फिर भी कुछ कवयित्रियों की रचनाओं पर राय दे ही देता हूँ "|
तभी पीछे से आवाज आई " आजकल ये महिला सशक्तिकरण पर काम कर रहे है "|

Sunday, November 30, 2014

गुनाह--

पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे डाल दिया था | वजह थी किसी ऐसे का क़त्ल जो एक लड़की का अपहरण करके उसे जिस्मफरोशी के दलदल में धकेलने जा रहा था | समाज और मीडिया उस पर थू थू कर रहा था क्योंकि उसका भी जुर्म का इतिहास था | उस लड़की को भी शक़ की निगाह से देखा जा रहा था |
जब अदालत में मामला पहुंचा तो लड़की का बयान था " जज साहब अगर ये आदमी मुजरिम है तो फिर उससे बड़ी मुजरिम मैं हूँ , क्यूंकि मेरी वजह से ही इसने क़त्ल किया | किसी की जान और उसकी इज़्ज़त बचाना गुनाह है इसीलिए ये समाज ऐसा नहीं करता है "| 

अपने--

" पिताजी देखो तो , कितनी बढ़िया गाड़ी ले आया हूँ मैं , आधे दाम में मिल गयी "|
" लेकिन बेटा , अभी तो स्कूटर से काम चल जा रहा था और घर की मरम्मत भी करानी थी , फिर ये कार "?
" क्या पिताजी , आपको तो बस कमियां ही निकालनी होती हैं मुझमे "|
" क्या करूँ , तुम्हारा दुश्मन हूँ न "|

Friday, November 28, 2014

सन्नाटा--

एक बार फिर आवाज आई , लगता था कहीं दूर से आ रही थी | चारो तरफ घटाटोप अँधेरा , उसपर कड़ाके की ठण्ड , हाँथ को हाँथ नहीं सूझ रहा था | हिम्मत करके बिस्तर से उठा और दरवाजे की तरफ बढ़ा | अचानक पैर से ज़मीन पर पड़ा गिलास टकराया और उसके लुढ़कने की आवाज पूरे घर में गूंज गयी | बुरी तरह चौंक गया वो , आजकल हर बात पर जैसे चौंक जाना उसकी आदत में शामिल हो गया था |
उम्र बढ़ने के साथ अब अकेलापन भी बिमारियों में शुमार हो गया है उसके | कभी यही घर कितना भरा रहता था , देर रात तक बच्चों के चिल्लाने की आवाजें , लगता ही नहीं कि कभी सन्नाटा भी था यहाँ | कब बच्चे अपनी दुनियां में खोते और उससे दूर होते चले गए , उसे अहसास ही नहीं हुआ | अब , वो अकेला जिंदगी के अंधेरों से रोशनी का क़तरा ढूँढ रहा था |
कितनी बार वो लड़ पड़ती थी उससे कि मैं जल्दी जाउंगी दुनिया से और तुम बाद में | लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि मेरे रहते तुम कैसे जा सकती हो , मैं अकेला नहीं पड़ जाऊंगा | धीरे से बीवी को अपनी आँखों के किनारों को पोंछते देखता था वो , लेकिन अगले ही पल सब भूल जाता था | उसका दिल ये मानने को तैयार ही नहीं था कि कभी ऐसा अकेलापन भी होगा |
कांपते हांथों से उसने दरवाजा खोला , ठण्ड का एक झोंका उसके बदन को चीर गया | बाहर घना अँधेरा था , शायद उसकी जिंदगी से ज्यादा घना | कुत्ता आकर उसके पैरों को छूने लगा | उसने दरवाजे को बंद किया और वापस बिस्तर पर लेट गया , नींद आज फिर उसकी आँखों से कोसों दूर थी | रात फिर सुबह की तरफ ख़रामा ख़रामा बढ़ रही थी |

Tuesday, November 25, 2014

फ़र्क़

" पापा , देखिये कितनी अच्छी ड्रेस लाये हैं हम लोग "|
" अभी पिछले महीने ही तो लिया था तुम लोगों ने , पैसे इस तरह बर्बाद नहीं करते "|
" तुम भी न , उनकी नानी आने वालीं हैं "|