एक बार फिर आवाज आई , लगता था कहीं दूर से आ रही थी | चारो तरफ घटाटोप अँधेरा , उसपर कड़ाके की ठण्ड , हाँथ को हाँथ नहीं सूझ रहा था | हिम्मत करके बिस्तर से उठा और दरवाजे की तरफ बढ़ा | अचानक पैर से ज़मीन पर पड़ा गिलास टकराया और उसके लुढ़कने की आवाज पूरे घर में गूंज गयी | बुरी तरह चौंक गया वो , आजकल हर बात पर जैसे चौंक जाना उसकी आदत में शामिल हो गया था |
उम्र बढ़ने के साथ अब अकेलापन भी बिमारियों में शुमार हो गया है उसके | कभी यही घर कितना भरा रहता था , देर रात तक बच्चों के चिल्लाने की आवाजें , लगता ही नहीं कि कभी सन्नाटा भी था यहाँ | कब बच्चे अपनी दुनियां में खोते और उससे दूर होते चले गए , उसे अहसास ही नहीं हुआ | अब , वो अकेला जिंदगी के अंधेरों से रोशनी का क़तरा ढूँढ रहा था |
कितनी बार वो लड़ पड़ती थी उससे कि मैं जल्दी जाउंगी दुनिया से और तुम बाद में | लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि मेरे रहते तुम कैसे जा सकती हो , मैं अकेला नहीं पड़ जाऊंगा | धीरे से बीवी को अपनी आँखों के किनारों को पोंछते देखता था वो , लेकिन अगले ही पल सब भूल जाता था | उसका दिल ये मानने को तैयार ही नहीं था कि कभी ऐसा अकेलापन भी होगा |
कांपते हांथों से उसने दरवाजा खोला , ठण्ड का एक झोंका उसके बदन को चीर गया | बाहर घना अँधेरा था , शायद उसकी जिंदगी से ज्यादा घना | कुत्ता आकर उसके पैरों को छूने लगा | उसने दरवाजे को बंद किया और वापस बिस्तर पर लेट गया , नींद आज फिर उसकी आँखों से कोसों दूर थी | रात फिर सुबह की तरफ ख़रामा ख़रामा बढ़ रही थी |
उम्र बढ़ने के साथ अब अकेलापन भी बिमारियों में शुमार हो गया है उसके | कभी यही घर कितना भरा रहता था , देर रात तक बच्चों के चिल्लाने की आवाजें , लगता ही नहीं कि कभी सन्नाटा भी था यहाँ | कब बच्चे अपनी दुनियां में खोते और उससे दूर होते चले गए , उसे अहसास ही नहीं हुआ | अब , वो अकेला जिंदगी के अंधेरों से रोशनी का क़तरा ढूँढ रहा था |
कितनी बार वो लड़ पड़ती थी उससे कि मैं जल्दी जाउंगी दुनिया से और तुम बाद में | लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि मेरे रहते तुम कैसे जा सकती हो , मैं अकेला नहीं पड़ जाऊंगा | धीरे से बीवी को अपनी आँखों के किनारों को पोंछते देखता था वो , लेकिन अगले ही पल सब भूल जाता था | उसका दिल ये मानने को तैयार ही नहीं था कि कभी ऐसा अकेलापन भी होगा |
कांपते हांथों से उसने दरवाजा खोला , ठण्ड का एक झोंका उसके बदन को चीर गया | बाहर घना अँधेरा था , शायद उसकी जिंदगी से ज्यादा घना | कुत्ता आकर उसके पैरों को छूने लगा | उसने दरवाजे को बंद किया और वापस बिस्तर पर लेट गया , नींद आज फिर उसकी आँखों से कोसों दूर थी | रात फिर सुबह की तरफ ख़रामा ख़रामा बढ़ रही थी |
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