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Wednesday, January 15, 2014

युवा

विश्व युवा दिवस पर --
देश का युवा आज रास्ता भटक गया है | उसे सही मार्ग दिखाना होगा और उसकी ऊर्जा को उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना होगा | प्रोफेसर साहब क्लास में बोल रहे थे और सभी स्टूडेंट्स उसे अपने सन्दर्भ में देख रहे थे | लेकिन वहीँ बैठी उनकी एक छात्रा समझ नहीं पा रही थी की आज का युवा मार्ग भटक गया है या ये बुज़ुर्ग | वो तो पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने का प्रयास कर रही थी लेकिन प्रोफेसर साहब को उसके द्वारा किया गया कोई भी काम पसंद नहीं आता था | और कल तो उसे बहुत बड़ा सदमा तब लगा जब प्रोफेसर ने कहा की "शाम को घर आ जाना , प्रोजेक्ट की डिटेल्स समझा दूंगा "| प्रोफेसर घर पे अकेले रहते थे , ये उसे पता था और उसने तय कर लिया कि अपनी ऊर्जा को अब सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा | अगले दिन अपने एक पत्रकार दोस्त को उसने साथ लिया और जैसे ही प्रोफेसर ने दरवाजा खोला , उसने तुरंत कहा कि इसे भी इस प्रोजेक्ट कि कुछ डिटेल्स समझना है | उस पत्रकार को वो भी जानते थे और अब प्रोजेक्ट पूरा होने लगा |
विनय

नेग

बधाई हो , बेटी हुई है | डॉक्टर ने जैसे ही बाहर आकर बताया , घर के सभी सदस्य खुश हो गए | नर्स बच्चे को लेकर थोड़ी देर बाद बाहर आयी और उसे उसके पिता को देकर जाने लगी |
अरे कहा जा रही हो , नेग तो लेती जाओ | दादी के ये शब्द सुनकर नर्स आश्चर्य से उनका मुह देखने लगी | शायद उसे बेटी के पैदा होने पर नेग नहीं मिलने की आदत पड़ चुकी थी |
विनय

बुलावा

आज क्या बात है , बड़े खुश दिख रहे हो | लगता है बेटे का बुलावा आ ही गया | बटोही ने ये सुनते ही हाँ में सर हिलाया और कहा " अरे अभी अभी सुंदर का फ़ोन आया था बंगलोर से , तुरंत हम दोनों को बुलाया है " और पुरे गाँव में घूम घूम कर बटोही सबको बताता रहा कि उसके लड़के ने कहा था न कि वह उन दोनों को शहर बुला लेगा | जाने की तैयारी होने लगी और दोनों मियां बीबी ढेर सारे सपने बुनने लगे |
उधर बंगलोर में सुंदर अपनी बीबी को समझा रहा था " आज कल घर में काम करने के लिए लोग कहा मिलते हैं , और मिल भी गए तो अनाप सनाप पैसे मांगते हैं | अच्छा है तुम्हे काम से फुर्सत मिलेगी और अपना नाम भी होगा की माँ बाप को अपने पास रखा है "
विनय

हैप्पी न्यू इयर

हैप्पी न्यू इयर , नया साल मुबारक | आतिशबाजियां छुड़ाते और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हुए लोग जोर जोर से चिल्ला रहे थे और एक दूसरे को नया साल मंगलमय होने कि शुभकामना भी दे रहे थे |
उसी जगह भयानक ठण्ड में एक झोपडी में फटे हुए कम्बल में गुड़मुड़ पड़ा हुआ मजदुर सोच रहा था कि अपना तो पुराना साल भी ऐसा ही था और इस साल भी शायद कुछ न बदले | अपना अच्छा साल कब आयेगा |
विनय

Saturday, January 11, 2014

मजदूरी

हमें समाज के मजदूर वर्ग को किसी भी हालत में ऊपर उठाना ही होगा | और इस काम के लिए हम सभी को आगे आना पड़ेगा | आईये हम सब मिलकर ये प्रण करे कि समाज के बीच की खाई को जितना जल्दी हो सके ,पाट देंगे | हमें न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाना होगा और मजदुर वर्ग के सभी समस्याओं का हल निकालना होगा | शर्माजी मजदूर दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप भाषण दे रहे थे और उपस्थित लोगों ने सुनकर खूब ताली बजायी | 
घर पहुचने के बाद अभी चाय पी ही रहे थे कि लड़के ने बताया कि आज उसने सभी मजदूरो को मजदूरी दे दी है | लेकिन जब उनको पता चला कि उनके बुद्धजीवी बेटे ने सबको २०० रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी है तो उनके चाय का स्वाद कसैला हो गया | वो तो १०० रुपये में ही काम चला लेते थे और उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इसकी शुरुआत उन्ही के घर से हो जायेगी |
विनय

Friday, January 10, 2014

वतन

सब कुछ नया नया सा लग रहा था | नयी जगह , नए लोग और अपनी जमीं से हजारो मील दूर एक नए देश में आना , सपना सच होने जैसा था | फिर कुछ महीने बीते और चीजों में अब वो नयापन नहीं रह गया | कहाँ अपने देश में और अपने लोगों के बीच में छोटी छोटी खुशिया भी बहुत बड़ी लगती थीं और बड़े बड़े ग़म भी छोटे लगते थे | और अब यहाँ सब कुछ बहुत अच्छा होते हुए भी खालीपन सा लगने लगा था | खुशियां तो बड़ी बड़ी थीं लेकिन कोई ऐसा नहीं था जिससे बांटा जा सके | शायद इसी को अपनी मिटटी से जुड़ाव कहते हैं और शायद इसी लिए लोग पूरी जिंदगी बाहर बिताने के बाद भी अपने वतन की मिटटी में आखिरी साँस लेना चाहते हैं | एफ एम पर गाना बज रहा था "चिट्ठी आयी है " और मन बनारस की गलियों में खो गया था ...... 
विनय

Wednesday, January 8, 2014

समय

समय 
सतीश ने एक बार फिर पलट कर देखा . वह राजेश ही था . सतीश के दिमाग में कुछ समय पहले की बात घूमने लगी . शायद सितम्बर का महीना था . सतीश शाम को नास्ता करने के लिए एक होटल में गया था . बिल देने के लिए जैसे ही काउंटर पर पंहुचा , काउंटर क्लर्क ने कहा की आपका बिल पे हो गया है . सतीश आस्चर्य से देखने लगा कि कौन है जिसने उसका बिल पे किया है तो पता चला कि वो आदमी राजेश है . राजेश उसके घर के पास ही रहता था और कभी कभी उसके ऑफिस में कुछ लोगो को लेकर आता था जिनका काम उसके टेबल से हो सकता था . सतीश ने पूछा कि क्यों उसने पेमेंट किया है तो उत्तर मिला कि एक ही बात है सर . बहुत कहने के बाद भी बिल वह नहीं दे पाया था .
आज राजेश सामने होते हुए भी नहीं पहचान पाने का अभिनय कर रहा था . सतीश को लगने लगा कि रिटायरमेंट ने जैसे उसका वजूद ही मिटा दिया हो .