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Friday, January 10, 2014

वतन

सब कुछ नया नया सा लग रहा था | नयी जगह , नए लोग और अपनी जमीं से हजारो मील दूर एक नए देश में आना , सपना सच होने जैसा था | फिर कुछ महीने बीते और चीजों में अब वो नयापन नहीं रह गया | कहाँ अपने देश में और अपने लोगों के बीच में छोटी छोटी खुशिया भी बहुत बड़ी लगती थीं और बड़े बड़े ग़म भी छोटे लगते थे | और अब यहाँ सब कुछ बहुत अच्छा होते हुए भी खालीपन सा लगने लगा था | खुशियां तो बड़ी बड़ी थीं लेकिन कोई ऐसा नहीं था जिससे बांटा जा सके | शायद इसी को अपनी मिटटी से जुड़ाव कहते हैं और शायद इसी लिए लोग पूरी जिंदगी बाहर बिताने के बाद भी अपने वतन की मिटटी में आखिरी साँस लेना चाहते हैं | एफ एम पर गाना बज रहा था "चिट्ठी आयी है " और मन बनारस की गलियों में खो गया था ...... 
विनय

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