"ऊ कोने वाली ज़मीन हमारे नाम लिख दो नहीं तो बहुत पछताओगे", दुक्खू के कान में रज्जू के शब्द एक बार फिर गूंज रहे थे| सालों से उसकी नजर थी उस ज़मीन पर, लेकिन दुक्खू बेचने के लिए तैयार नहीं था|
"वही तो एक ठो ठीक ज़मीन है हमारे पास, उसको कैसे दे दें| और आपके पास ज़मीन की कौन सी कमी है", दुक्खू ने जवाब दिया था और आगे बढ़ गया|
रोड से सटे उस कोने वाली ज़मीन के चलते रज्जू का प्लाट टेढ़ा था, और उसने कई बार समझाने का प्रयास किया दुक्खू को| आखिरकार उसने धमकी भी दे डाली लेकिन दुक्खू ने कान नहीं दिया|
होलिका दहन के समय इस बार रज्जू ने खूब मेहनत की, सारे गाँव को बुलाया और दुक्खू के घर भी गया बुलाने| इधर सारा गाँव होलिकादहन के लिए इकठ्ठा हुआ और उधर दुक्खू के घर की तरफ कुछ साये लपके|
थोड़ी देर बाद ही एक जगह होलिका जल रही थी तो दूसरी तरफ दुक्खू अपने घर को जलता देख रहा था| रज्जू अपनी जीत पर उल्लास मना रहा था लेकिन दुक्खू ने अब अपने उसी कोने वाली ज़मीन पर अपना झोपड़ा बनाने का इरादा कर लिया|
"वही तो एक ठो ठीक ज़मीन है हमारे पास, उसको कैसे दे दें| और आपके पास ज़मीन की कौन सी कमी है", दुक्खू ने जवाब दिया था और आगे बढ़ गया|
रोड से सटे उस कोने वाली ज़मीन के चलते रज्जू का प्लाट टेढ़ा था, और उसने कई बार समझाने का प्रयास किया दुक्खू को| आखिरकार उसने धमकी भी दे डाली लेकिन दुक्खू ने कान नहीं दिया|
होलिका दहन के समय इस बार रज्जू ने खूब मेहनत की, सारे गाँव को बुलाया और दुक्खू के घर भी गया बुलाने| इधर सारा गाँव होलिकादहन के लिए इकठ्ठा हुआ और उधर दुक्खू के घर की तरफ कुछ साये लपके|
थोड़ी देर बाद ही एक जगह होलिका जल रही थी तो दूसरी तरफ दुक्खू अपने घर को जलता देख रहा था| रज्जू अपनी जीत पर उल्लास मना रहा था लेकिन दुक्खू ने अब अपने उसी कोने वाली ज़मीन पर अपना झोपड़ा बनाने का इरादा कर लिया|
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