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Saturday, July 5, 2014

अंतर

"डाक्टर साहब , ये बच्ची हमें नहीं चाहिए", बोलते हुए उस महिला के आँखों में आँसू आ गए थे |
"देखो , बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है और अब देर भी काफी हो गयी है , तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है" |
" आप तो एबॉर्शन कर दीजिये , और कौन सी हमारे बेटे की उमर निकल गयी है" , सास ने ठन्डे स्वर में कहा । 

सीख

“अरे चाची , अब इस उमर में अंग्रेजी सीखने जा रही हो”|
“अब क्या बताएं , बेटा बता रहा था की बहू कान्वेंट में पढ़ी है और फर्राटे से अंग्रेजी बोलती है”|
“तो क्या हुआ , बेटा तो तुम्हारा ही है , समझा देगा बहू को”|
“वही समझने के लिए तो सीख रही हूँ “|

थप्पड़

तड़ाक , थप्पड़ बड़े जोर का था और साहब की उतनी ही तीखी आवाज़ " खाने में फिर बाल , दिखाई नहीं देता तुमको "|
बाई भी सहम गयी और सोचने लगी कि कल तो मेमसाब कह रहीं थीं कि कैसा मर्द है तुम्हारा , तुमको पी कर पीटता है , और साहब ने तो आज पी भी नहीं है |  

आज़ादी

हैप्पी इंडिपेंडेंस डे , आज़ादी की वर्षगांठ मुबारक | आतिशबाजियां छुड़ाते और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हुए लोग चिल्ला रहे थे और एक दूसरे को इंडिपेंडेंस डे की शुभकामना भी दे रहे थे |
और सामने की मिठाई की दुकान पर छोटू रात के ११ बजे दौड़ दौड़ कर लोगों को पानी दे रहा था और टेबल साफ़ कर रहा था | 

Friday, July 4, 2014

पढ़ाई लिखाई--

" बीबीजी, आप नौकरी क्यों करते हो, आपके पास तो पैसे की कोई कमी नहीं है"|
" पैसा ही सब नहीं होता रे जिंदगी में, आखिर अपनी पढ़ाई लिखाई कब काम आएगी", बीबीजी ने उसे समझाने की कोशिश की|
अभी कुछ दिन पहले ही जब महरी ने कहा था कि मंहगी बहुत बढ़ गयी है और उसकी पगार भी थोड़ी बढ़ जाये तो बीबीजी ने उसे बड़े ही कठोर लहजे में मना कर दिया था|
आज शायद पढ़ाई लिखाई का उपयोग महरी की समझ में आ गया था|

उदासी--

आज हॉस्टल में उसके जन्मदिन पर खूब मस्ती हुई, केक काटा गया, पार्टी हुई और खूब नाच गाना हुआ| पूरी पार्टी के दौरान वह उदास ही रहा, हालांकि किसी को उसकी उदासी का आभास तक नहीं हुआ| लेकिन रात को जब वह अपने कमरे में पहुंचा तो तमाम कोशिशों के बावजूद भी अपने आँसुओं को नहीं रोक पाया| तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, उसने जल्दी जल्दी अपने को सामान्य करने का प्रयास करते हुए दरवाजा खोला।
"क्या यार, तू उदास क्यों है आज ? आज तो तुझे खुश रहना चाहिए, बर्थडे के दिन भी कोई उदास रहता है क्या ?"
"नहीं तो, मैं उदास कहाँ हूँ यार" जबरदस्ती मुस्कुराते हुए उसने कहा|
"देख, तेरी हर बात मुझे पता है, लेकिन अपनी इस उदासी का कारण नहीं बताया तूने मुझे| चल बता, क्या बात है ?"|
बड़ी मुश्किल से रोका हुआ सब्र का बांध ढह गया और हिचकियाँ बंध गयीं उसकी| थोड़ा संयत होने के बाद भरे गले से बस इतना ही कह पाया, "मेरे जन्म का और मेरी माँ के जाने का दिन एक ही नहीं होना चाहिए था"| 

Wednesday, July 2, 2014

हैवानियत

सिग्नल लाल हो गया था इसलिए कार रोकनी पड़ी | अचानक नज़र पड़ी सड़क के किनारे भीख मांगते हुए बच्चों पर | जाड़े का मौसम और फ़टे कपड़े पहने बच्चे इस कार से उस कार तक दौड़ लगा रहे थे | मेरे शीशे पर भी दस्तक देने लगा एक बच्चा , मन व्यथित हो गया और कुछ पैसे निकाल कर दे दिया उसको |
शाम को घर पर चाय पीते हुए एक समाचार पे नज़र गयी , लिखा था कि बच्चों से भीख मंगवाने वाले एक गिरोह का सरगना गिरफ्तार | पूरी खबर पढ़ कर रोंगटे खड़े हो गए , कैसे बच्चों का अपहरण करके उनको इन गिरोहों को बेच देते हैं | फिर उनकी शारीरिक छति ( अंग-भंग ) करके भीख मांगने की ट्रेनिंग देते हैं और उनका टारगेट की रोज़ इतने पैसे लाना ही है नहीं तो भूखा रखेंगे और यातना अलग |
पैसे कमाने के लिए किस हद तक जा सकता है इंसान , उफ़्फ़ | कैसे किसी मासूम को इस पेशे में धकेल देते हैं लोग ? क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं की हम पता लगाएं कि भीख मांग रहा बच्चा सचमुच किसी गरीब घर का है या किसी गिरोह द्वारा अपहृत ? क्या आगे से ऐसे किसी बच्चे को कुछ दे पाउँगा , निर्णय नहीं कर पा रहा था मैं |