सिग्नल लाल हो गया था इसलिए कार रोकनी पड़ी | अचानक नज़र पड़ी सड़क के किनारे भीख मांगते हुए बच्चों पर | जाड़े का मौसम और फ़टे कपड़े पहने बच्चे इस कार से उस कार तक दौड़ लगा रहे थे | मेरे शीशे पर भी दस्तक देने लगा एक बच्चा , मन व्यथित हो गया और कुछ पैसे निकाल कर दे दिया उसको |
शाम को घर पर चाय पीते हुए एक समाचार पे नज़र गयी , लिखा था कि बच्चों से भीख मंगवाने वाले एक गिरोह का सरगना गिरफ्तार | पूरी खबर पढ़ कर रोंगटे खड़े हो गए , कैसे बच्चों का अपहरण करके उनको इन गिरोहों को बेच देते हैं | फिर उनकी शारीरिक छति ( अंग-भंग ) करके भीख मांगने की ट्रेनिंग देते हैं और उनका टारगेट की रोज़ इतने पैसे लाना ही है नहीं तो भूखा रखेंगे और यातना अलग |
पैसे कमाने के लिए किस हद तक जा सकता है इंसान , उफ़्फ़ | कैसे किसी मासूम को इस पेशे में धकेल देते हैं लोग ? क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं की हम पता लगाएं कि भीख मांग रहा बच्चा सचमुच किसी गरीब घर का है या किसी गिरोह द्वारा अपहृत ? क्या आगे से ऐसे किसी बच्चे को कुछ दे पाउँगा , निर्णय नहीं कर पा रहा था मैं |
शाम को घर पर चाय पीते हुए एक समाचार पे नज़र गयी , लिखा था कि बच्चों से भीख मंगवाने वाले एक गिरोह का सरगना गिरफ्तार | पूरी खबर पढ़ कर रोंगटे खड़े हो गए , कैसे बच्चों का अपहरण करके उनको इन गिरोहों को बेच देते हैं | फिर उनकी शारीरिक छति ( अंग-भंग ) करके भीख मांगने की ट्रेनिंग देते हैं और उनका टारगेट की रोज़ इतने पैसे लाना ही है नहीं तो भूखा रखेंगे और यातना अलग |
पैसे कमाने के लिए किस हद तक जा सकता है इंसान , उफ़्फ़ | कैसे किसी मासूम को इस पेशे में धकेल देते हैं लोग ? क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं की हम पता लगाएं कि भीख मांग रहा बच्चा सचमुच किसी गरीब घर का है या किसी गिरोह द्वारा अपहृत ? क्या आगे से ऐसे किसी बच्चे को कुछ दे पाउँगा , निर्णय नहीं कर पा रहा था मैं |
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