आज हॉस्टल में उसके जन्मदिन पर खूब मस्ती हुई, केक काटा गया, पार्टी हुई और खूब नाच गाना हुआ| पूरी पार्टी के दौरान वह उदास ही रहा, हालांकि किसी को उसकी उदासी का आभास तक नहीं हुआ| लेकिन रात को जब वह अपने कमरे में पहुंचा तो तमाम कोशिशों के बावजूद भी अपने आँसुओं को नहीं रोक पाया| तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, उसने जल्दी जल्दी अपने को सामान्य करने का प्रयास करते हुए दरवाजा खोला।
"क्या यार, तू उदास क्यों है आज ? आज तो तुझे खुश रहना चाहिए, बर्थडे के दिन भी कोई उदास रहता है क्या ?"
"नहीं तो, मैं उदास कहाँ हूँ यार" जबरदस्ती मुस्कुराते हुए उसने कहा|
"देख, तेरी हर बात मुझे पता है, लेकिन अपनी इस उदासी का कारण नहीं बताया तूने मुझे| चल बता, क्या बात है ?"|
बड़ी मुश्किल से रोका हुआ सब्र का बांध ढह गया और हिचकियाँ बंध गयीं उसकी| थोड़ा संयत होने के बाद भरे गले से बस इतना ही कह पाया, "मेरे जन्म का और मेरी माँ के जाने का दिन एक ही नहीं होना चाहिए था"|
"क्या यार, तू उदास क्यों है आज ? आज तो तुझे खुश रहना चाहिए, बर्थडे के दिन भी कोई उदास रहता है क्या ?"
"नहीं तो, मैं उदास कहाँ हूँ यार" जबरदस्ती मुस्कुराते हुए उसने कहा|
"देख, तेरी हर बात मुझे पता है, लेकिन अपनी इस उदासी का कारण नहीं बताया तूने मुझे| चल बता, क्या बात है ?"|
बड़ी मुश्किल से रोका हुआ सब्र का बांध ढह गया और हिचकियाँ बंध गयीं उसकी| थोड़ा संयत होने के बाद भरे गले से बस इतना ही कह पाया, "मेरे जन्म का और मेरी माँ के जाने का दिन एक ही नहीं होना चाहिए था"|
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