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Wednesday, October 22, 2014

सर्वव्यापी--

" त्योहारों के मौसम में इनकी बिक्री बहुत बढ़ गयी है " , मुस्कुराते दुकानदारों की बातचीत सुनते हुए उसने देखा , फुटपाथ पर बिछे हुए तमाम देवी देवताओं के चित्र इसकी गवाही दे रहे थे |
" भगवान हर जगह होते हैं , उन्हें खोजने की जरुरत नहीं " , मंदिर में सुना ये प्रवचन उसे याद आ गया |    

उजियारा --

चारो ओर पटाखों का शोर गूंज रहा था , पूरा गाँव रौशनी से चमक रहा था | लेकिन रघु के कदम तो जैसे जम गए थे , उठते ही नहीं थे | क्या सोच कर चला था , लेकिन अब क्या मुंह लेकर घर जाए |
घर में मेहरारू और बिटिया उसकी राह देख रहे होंगे | दीवाली का मौका , पास में कुछ पैसे होते तो वो भी कुछ पटाखे और नए कपड़े ले लेता उनके लिए | लेकिन महाजन ने भी मना कर दिया | घर से थोड़ा पहले एक पेड़ के नीचे बैठ गया वो , हिम्मत जवाब दे गयी उसकी |
" बापू , यहाँ काहे बैठे हो , घर चलो , हम लोग कब से तुम्हरी राह देख रहे हैं ", बिटिया की आवाज सुन वो चौंक उठा |
" माफ़ कर दे बिटिया , कुछ ला नहीं पाये तुम्हरे लिए ", उसका गला भर्रा गया |
" घर तो चलो बापू " और उसका हाँथ खींच कर बिटिया उसे ले गयी |
" माँ , माँ , बापू आ गए ", बिटिया ने हुलस कर माँ को आवाज लगायी |
" अरे तुम्हीं से हम लोगन का होली दीवाली है , कुछ ला नहीं पाये तो का हुआ , तुम तो हो ना , फिर मन जाई दीवाली " |
मेहरारू समझा रही थी , घर के बाहर और अंदर कुछ दिए झिलमिला रहे थे और उजियारा धीरे धीरे उसके मन के अंधियारे को मिटा रहा था |

Sunday, October 19, 2014

फ़र्ज़--

डॉक्टर के पेशानी पर ठण्ड में भी पसीने की बुँदे चुहचुहाँ रहीं थी | सामने पड़ा हुआ शख्स कोई मामूली शख्स नहीं था | एक तरफ इंसानियत और पेशे का फ़र्ज़ तो दूसरी तरफ देश और समाज का |
मरीज़ का चेहरा देखते ही वो उसे पहचान गए थे | एक बार उनका हाथ अपने सेल फोन पर गया लेकिन फिर उसे वापस रख दिया | क्या करें , इसी उधेड़बुन में ऑपरेशन टेबल पर पहुँच गए | 
करीब एक घंटे बाद बाहर निकले तो उनके जेहन में अपने पेशे में बताई गयी पहली सीख घूम रही थी " डॉक्टर का पहला फ़र्ज़ होता है जान बचाना " |

Saturday, October 18, 2014

दिए--

किसी के आस के दिए ,
किसी के एहसास के दिए ,
सोचा था इस बार जलाएंगे ,
लेकिन वक़्त की तल्खी ने ,
बुझा दिए , सारे ज़ज्बात के दिए ,
काश कि हम सचमुच जला पाते ,
रौशनी सब ओर फैला पाते ,
किसी भी तूफ़ान में बुझे नहीं ,
ऐसे दिए हम ला पाते ,
लेकिन कभी जरूर जलाएंगे हम ,
खुशियों और उम्मीदों की सौगात के दिए !!

प्रगति--

हर साल की तरह इस साल भी दिवाली पर बूढी अम्मा दिए लेकर सड़क के किनारे बैठ गयी | 
पर इस साल उनका एक भी दिया नही बिका | 
वो मायूस होकर बोली " अगले साल से हम दिया नाही बेचब , अब जमाना बदल गइल हौ , लोगन के पास इतना समय नाही हौ ई दिया के जलावे खातिर "
अंजू सिंह..

जीवन--

कई सालों से वो बूढी औरत फुटपाथ पर दिए बेच रही थी |
आज पूछ ही लिया " दिए कब तक बेचती रहोगी दादी " |
" जब तक लौ बची है बेटा " |

Thursday, October 16, 2014

नमस्कार " नया लेखन - नए दस्तखत "के मित्रो--

नमस्कार " नया लेखन - नए दस्तखत "के मित्रो | जैसा कि आपको बताया जा चूका हैं इस मंच के पटल पर प्रत्येक सप्ताह एक तस्वीर दी जायेगी और उस तस्वीर को देखकर सभी एक लघु कथा लिखेंगे . यह एक सामान्य सी प्रतियोगिता होगी जिसमें सभी सदस्य भाग ले सकते हैं सिवाय एडमिन/ जज और फोटो प्रस्तुत करने वाले सदस्य के ,
इस प्रतियोगिता के नियम इस प्रकार होंगे
1 सिर्फ एक लघु कथा ही पोस्ट की जानी चाहिए
2.दिए गयी समय सीमा से पहले या पश्चात पोस्ट की गयी लघु कथा मान्य नही होगी 
3 . बेस्ट लघु कथा का चयन एडमिन /मनोनीत जज और फोटो देने वाला सदस्य करेगा और अंतिम निर्णय ही मान्य होगा
4.जो विजेता घोषित होगा उसको अगले सप्ताह फोटो पोस्ट करने का अधिकार प्रदान किया जाएगा
5. जब ब्लॉग बनाया जायेगा तो पुरुस्कृत लघु कथाओं को सर्वश्रेष्ठ लघु कथा के नाम से पोस्ट किया जाएगा
6 . आपकी लघु कथा का मूल भाव आप से पहले पोस्ट लघु कथाओं के समान नही होना चाहिए
7 . समय- आज रात 8 बजे से शनिवार रात 11 बजे तक लघु कथा पोस्ट की जा सकती हैं
8. इस प्रतियोगिता का उद्देश्य मनोरंजन के साथ साथ लेखन सीखने को प्रेरित करना हैं एक चित्र पर सबके विभिन्न भाव एक उत्सुकता जगाते हैं इसे सकारात्मक रूप से ग्रहण कीजिये
9. आलोचना नही समालोचना कीजिये सिर्फ लाइक नही करिए उचित मार्गदर्शन की दरकार सबको रहती हैं दूसरों के सुझावों को सकारात्मक रूप से ले नकारात्मकता से नही
१०. पुराने मित्र गणों से आग्रह हैं की लघु कथा लिखते रहे नए कहानीकारों से आग्रह हैं की आपकी लघु कथाओं का इस ग्रुप को इंतज़ार हैं आपकी लघु कथाएं आपकी सोच की परिपक्वता को दर्शाती हैं .
११ .लघु कथा के साथ चित्र पोस्ट करे तो अच्छा होगा .परन्तु लघु कथा के उपर ' प्रतियोगिता के लिय " लिखना अनिवार्य हैं .देखा गया हैं सब लघु कथा पोस्ट कर देते हैं परन्तु प्रतियोगिता के लिय लिखना भूल जाते हैं कृपया ध्यान दे इस तरफ भी ...
इस बार चित्र दिया हैं अर्चना तिवारी जी ने और जज होंगे श्री योगराज प्रभाकर जी , विवेक झा जी ,    जी एवम विनय कुमार..