चारो ओर पटाखों का शोर गूंज रहा था , पूरा गाँव रौशनी से चमक रहा था | लेकिन रघु के कदम तो जैसे जम गए थे , उठते ही नहीं थे | क्या सोच कर चला था , लेकिन अब क्या मुंह लेकर घर जाए |
घर में मेहरारू और बिटिया उसकी राह देख रहे होंगे | दीवाली का मौका , पास में कुछ पैसे होते तो वो भी कुछ पटाखे और नए कपड़े ले लेता उनके लिए | लेकिन महाजन ने भी मना कर दिया | घर से थोड़ा पहले एक पेड़ के नीचे बैठ गया वो , हिम्मत जवाब दे गयी उसकी |
" बापू , यहाँ काहे बैठे हो , घर चलो , हम लोग कब से तुम्हरी राह देख रहे हैं ", बिटिया की आवाज सुन वो चौंक उठा |
" माफ़ कर दे बिटिया , कुछ ला नहीं पाये तुम्हरे लिए ", उसका गला भर्रा गया |
" घर तो चलो बापू " और उसका हाँथ खींच कर बिटिया उसे ले गयी |
" माँ , माँ , बापू आ गए ", बिटिया ने हुलस कर माँ को आवाज लगायी |
" अरे तुम्हीं से हम लोगन का होली दीवाली है , कुछ ला नहीं पाये तो का हुआ , तुम तो हो ना , फिर मन जाई दीवाली " |
मेहरारू समझा रही थी , घर के बाहर और अंदर कुछ दिए झिलमिला रहे थे और उजियारा धीरे धीरे उसके मन के अंधियारे को मिटा रहा था |
घर में मेहरारू और बिटिया उसकी राह देख रहे होंगे | दीवाली का मौका , पास में कुछ पैसे होते तो वो भी कुछ पटाखे और नए कपड़े ले लेता उनके लिए | लेकिन महाजन ने भी मना कर दिया | घर से थोड़ा पहले एक पेड़ के नीचे बैठ गया वो , हिम्मत जवाब दे गयी उसकी |
" बापू , यहाँ काहे बैठे हो , घर चलो , हम लोग कब से तुम्हरी राह देख रहे हैं ", बिटिया की आवाज सुन वो चौंक उठा |
" माफ़ कर दे बिटिया , कुछ ला नहीं पाये तुम्हरे लिए ", उसका गला भर्रा गया |
" घर तो चलो बापू " और उसका हाँथ खींच कर बिटिया उसे ले गयी |
" माँ , माँ , बापू आ गए ", बिटिया ने हुलस कर माँ को आवाज लगायी |
" अरे तुम्हीं से हम लोगन का होली दीवाली है , कुछ ला नहीं पाये तो का हुआ , तुम तो हो ना , फिर मन जाई दीवाली " |
मेहरारू समझा रही थी , घर के बाहर और अंदर कुछ दिए झिलमिला रहे थे और उजियारा धीरे धीरे उसके मन के अंधियारे को मिटा रहा था |
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