Translate

Sunday, October 19, 2014

फ़र्ज़--

डॉक्टर के पेशानी पर ठण्ड में भी पसीने की बुँदे चुहचुहाँ रहीं थी | सामने पड़ा हुआ शख्स कोई मामूली शख्स नहीं था | एक तरफ इंसानियत और पेशे का फ़र्ज़ तो दूसरी तरफ देश और समाज का |
मरीज़ का चेहरा देखते ही वो उसे पहचान गए थे | एक बार उनका हाथ अपने सेल फोन पर गया लेकिन फिर उसे वापस रख दिया | क्या करें , इसी उधेड़बुन में ऑपरेशन टेबल पर पहुँच गए | 
करीब एक घंटे बाद बाहर निकले तो उनके जेहन में अपने पेशे में बताई गयी पहली सीख घूम रही थी " डॉक्टर का पहला फ़र्ज़ होता है जान बचाना " |

No comments:

Post a Comment