Translate

Wednesday, September 30, 2015

गाँव के मंजर--

हमसे ये गाँव के मंजर नहीं देखे जाते
हो रहे खेत जो बंजर , नहीं देखे जाते
सुना था हुक्मरानों को , करेंगे गाँव की सेवा
छुपा था बातों में खंजर , नहीं देखे जाते
सिकुड़ती जा रही नदियाँ , नहीं हैं पानी के सोते
है बहता खूब समंदर , नहीं देखे जाते
जो होती थी कभी गुलज़ार , हमारे गांव की बस्ती
वहीँ उजड़े हुए अब घर , नहीं देखे जाते
हमसे ये गाँव के मंजर नहीं देखे जाते
हो रहे खेत जो बंजर , नहीं देखे जाते !!

Wednesday, September 23, 2015

हौसलों के गुब्बारे--

उस दिन बादल तो सुबह से ही घुमड़ रहे थे लेकिन बरसात शायद न हो सोचते हुए रग्घू निकल पड़ा था अपने रंगीन गुब्बारों और भेल के साथ | गुब्बारे क्या थे , वो तो रंगबिरंगे सपने बेचता था | वो सपने जो वो अपने बच्चों के लिए भी देखता था और जो बाक़ी बच्चे भी उसके गुब्बारे देखकर देखते थे | 
अचानक भगदड़ मच गयी समुद्र तट पर , भयानक ज्वार के चपेट में आकर कोई डूब रहा था और लोग चिल्ला रहे थे । रग्घू ने एक पल भी नहीं लगाया और गुब्बारों को हवा में छोड़ कूद गया उसे बचाने के लिए । पर लहरें तेज़ निकलीं और रग्घू भी उसके साथ समां गया समंदर में । 
अब लोगों को कभी कभी , भयानक ज्वार के समय , दूर समंदर के किनारे हांथों में गुब्बारे और दिल में हौसला लेकर खड़ा रग्घू दिख जाता है ।

आज़ादी की कीमत--

सिग्नल पर रुकते ही एक बच्चा झंडे लेकर आ गया | जल्दी से उसने कार का शीशा चढ़ाया और सर दूसरी तरफ घुमा लिया , लेकिन बच्चे ने शीशे पर दस्तक दी और उम्मीद भरी निगाहों से देखने लगा | 
पिज़्ज़ा खाती हुई बेटी ने कहा " पापा , ले लो न झण्डा , स्कूल में ले जाउंगी "| 
उसने बच्चे को आने का इशारा किया और २ झण्डा लेकर ५ का सिक्का उछाल दिया बच्चे की तरफ | बच्चा कुछ कहे उसके पहले ही सिग्नल हरा हो गया और उसने तुरंत कार आगे बढ़ा ली | उसने साइड मिरर में देखा, बच्चा सड़क के किनारे से सिक्का उठा रहा था और कार में ऍफ़ एम पर गाना बज रहा था " मेरे देश की धरती "|

अलग पीढ़ी--

कड़क इस्त्री किया हुआ धवल कुर्ता पैजामा , सफ़ेद एडिडास का जूता और आँखों पर रेबैन का काला चश्मा लगाकर परफ्यूम छिड़कते हुए वो बाहर निकल रहा था । आज फिर किसी चुनावी सभा में भाषण देना था उसको । 
कमरे में खटिया पर धोती और बंडी में लेटे पिताजी ने उसे जाते देखा और अपने स्वतंत्रता संग्राम के दिनों की याद में डूब गए , जब गाँधीजी के आह्वान पर उन्होंने सिर्फ धोती कुर्ता में सादगी से जीवन बिताने का फ़ैसला कर लिया था ।

सहमति--

" अगर उसने मेरी बात नहीं मानी तो मैं आगे से उससे बात नहीं करुँगी | हमारा लड़का ही ऐसा काम करेगा, विधर्मी से शादी "? 
" क्यूँ , अब क्या हो गया | बचपन में तो बस उसका मुँह खुलने की देरी होती थी और तुम हर इच्छा पूरी कर देती थी "| 
" वो तो उसकी ख़ुशी के लिए कर देती थी , लेकिन क्या उसे हमारी ख़ुशी की परवाह नहीं रही | आज तक हमारे खानदान में ऐसा नहीं हुआ ", कहते कहते उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े |
" वही तो मैं भी कह रहा हूँ , उसकी ख़ुशी के लिए ही अब भी कर दो | वैसे भी वो हमारा ध्यान रखने में कोई कमी नहीं रखता है "|
उन्होंने धीरे से उनका हाँथ अपने हाँथ में पकड़ लिया और उनके आंसू पोंछ दिए | सहमति मिल चुकी थी |

नाग--

" अरे कहाँ जा रहे हो फूल माला लेकर ?
" चाचा के यहाँ | आज उनकी पूजा करना जरुरी है "|
चाचा ने तो धोखे से उनका सब कुछ हड़प लिया था और वो सड़क पर आ गए थे , फिर उनकी पूजा | अचानक उसे याद आया , आज नागपंचमी है |

ढहती दीवारें--

" आज मुझे ये मानने में कोई गुरेज नहीं है कि तुम मुझसे बेहतर लिखती हो ", कंधे पर पत्नी का हाथ महसूस करते ही उनके मुँह से ये बेसाख्ता निकल गया | 
" पुरुष होने का अहंकार मुझे आजतक ये मानने से रोकता रहा था , लेकिन सच्चाई यही है तनू ", और पलट कर देखा उन्होंने उसकी तरफ | 
हांथ में पत्नी की पुरष्कृत पुस्तक और उनके चेहरे की हँसी बता रही थी कि वो बांध टूट चुका था | तनू भी उनकी हँसी में शामिल हो गयी , आज उसे अपने जीवन का सबसे कीमती पुरस्कार मिल गया था |