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Wednesday, September 23, 2015

अलग पीढ़ी--

कड़क इस्त्री किया हुआ धवल कुर्ता पैजामा , सफ़ेद एडिडास का जूता और आँखों पर रेबैन का काला चश्मा लगाकर परफ्यूम छिड़कते हुए वो बाहर निकल रहा था । आज फिर किसी चुनावी सभा में भाषण देना था उसको । 
कमरे में खटिया पर धोती और बंडी में लेटे पिताजी ने उसे जाते देखा और अपने स्वतंत्रता संग्राम के दिनों की याद में डूब गए , जब गाँधीजी के आह्वान पर उन्होंने सिर्फ धोती कुर्ता में सादगी से जीवन बिताने का फ़ैसला कर लिया था ।

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