उस दिन बादल तो सुबह से ही घुमड़ रहे थे लेकिन बरसात शायद न हो सोचते हुए रग्घू निकल पड़ा था अपने रंगीन गुब्बारों और भेल के साथ | गुब्बारे क्या थे , वो तो रंगबिरंगे सपने बेचता था | वो सपने जो वो अपने बच्चों के लिए भी देखता था और जो बाक़ी बच्चे भी उसके गुब्बारे देखकर देखते थे |
अचानक भगदड़ मच गयी समुद्र तट पर , भयानक ज्वार के चपेट में आकर कोई डूब रहा था और लोग चिल्ला रहे थे । रग्घू ने एक पल भी नहीं लगाया और गुब्बारों को हवा में छोड़ कूद गया उसे बचाने के लिए । पर लहरें तेज़ निकलीं और रग्घू भी उसके साथ समां गया समंदर में ।
अब लोगों को कभी कभी , भयानक ज्वार के समय , दूर समंदर के किनारे हांथों में गुब्बारे और दिल में हौसला लेकर खड़ा रग्घू दिख जाता है ।
अचानक भगदड़ मच गयी समुद्र तट पर , भयानक ज्वार के चपेट में आकर कोई डूब रहा था और लोग चिल्ला रहे थे । रग्घू ने एक पल भी नहीं लगाया और गुब्बारों को हवा में छोड़ कूद गया उसे बचाने के लिए । पर लहरें तेज़ निकलीं और रग्घू भी उसके साथ समां गया समंदर में ।
अब लोगों को कभी कभी , भयानक ज्वार के समय , दूर समंदर के किनारे हांथों में गुब्बारे और दिल में हौसला लेकर खड़ा रग्घू दिख जाता है ।
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