घर में घुसते ही उसे लग गया कि आज भी पिताजी कुछ अनमने से हैं, अब यह बात उसे परेशान करने लगी थी| कमरे में पहुँच के उसने शर्ट उतारी तब तक मिन्नी भी आ गयी| जब मिन्नी के बढ़े हुए हाथ से उसने पानी का ग्लास नहीं लिया तो मिन्नी को भी खटका|
"क्या बात है, आज परेशान हो, कुछ खास वजह?, मिन्नी ने ग्लास मेज पर रखते हुए कहा|
"पता नहीं मैं सच सोच रहा हूँ या गलत, लेकिन मुझे लगता है जैसे पिताजी आजकल कुछ उदास रहने लगे हैं", उसने पानी का ग्लास उठाते हुए कहा|
"मैं तो हमेशा उनसे बात करती रहती हूँ, अक्सर उनसे पूछ कर ही खाना बनाती और खिलाती हूँ, कहीं तुम कुछ और तो नहीं सोच रहे?, मिन्नी के माथे पर चिंता की लकीरें फ़ैल गयीं|
"अरे तुम तो उनका जितना ख्याल रखती हो, उतना तो मैं भी नहीं रखता| लेकिन उनकी उदासी की वजह जानना जरुरी है, आज ही पूछता हूँ", कहकर वह ड्राइंग रूम में चल दिया| मिन्नी भी पीछे पीछे आयी और खड़ी हो गयी|
"क्या बात है पिताजी, आप आजकल थोड़े उदास लग रहे हैं? माँ की याद आ रही है क्या आजकल", उसने पिताजी के मन को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा|
पिताजी इस अचानक हुए सवाल से चौंक गए और संभलते हुए बोले "अभी तू थका मांदा ऑफिस से आ रहा है और ये सब क्या बात करने लगा| अरे बेटी तूने इसे पानी वानी दिया कि नहीं", बात टालने की गरज से पिताजी ने कहा|
"नहीं पिताजी, सच सच बताईये, पहले तो आप बहुत मजे में मुझसे बात करते थे लेकिन आजकल कुछ कम बात करते हैं| बेटी को भी नहीं बताएँगे आप?, मिन्नी ने भी पिताजी के पास बैठते हुए कहा|
"कोई बात नहीं है, अब इस बंगले में किसी चीज की कमी भी तो नहीं है, हर सुख सुविधा तो है यहाँ| बस ऐसे ही कभी कभी हो जाता है, अब उम्र भी तो हो चली मेरी", पिताजी ने स्नेह से मिन्नी के सर पर हाथ फेरा|
"तो फिर आप पहले जैसे खुश रहा कीजिये ना, हमारे लिए ही सही", मिन्नी ने एक बार फिर उनसे मनुहार किया|
"अरे तू चिंता मत कर, मैं बहुत खुश रहता हूँ| बस तू एक काम कर सकता है क्या, बंगले के पिछवाड़े का फर्श हटाकर वहां मिट्टी की एक क्यारी बनवा दे, मिट्टी से बहुत दूर हो गया हूँ आजकल", पिताजी ने जैसे कुछ याद करते हुए कहा|
अब उसे समझ में आ गया था, किसान पिता को मिट्टी से दूर करके वह कैसे खुश रख सकता है| उसने मिन्नी की तरफ देखा और दोनों मुस्कुरा पड़े|
पिताजी इन सबसे बेखबर दूर कहीं अपने गांव और खेतों में खो गए थे|
"क्या बात है, आज परेशान हो, कुछ खास वजह?, मिन्नी ने ग्लास मेज पर रखते हुए कहा|
"पता नहीं मैं सच सोच रहा हूँ या गलत, लेकिन मुझे लगता है जैसे पिताजी आजकल कुछ उदास रहने लगे हैं", उसने पानी का ग्लास उठाते हुए कहा|
"मैं तो हमेशा उनसे बात करती रहती हूँ, अक्सर उनसे पूछ कर ही खाना बनाती और खिलाती हूँ, कहीं तुम कुछ और तो नहीं सोच रहे?, मिन्नी के माथे पर चिंता की लकीरें फ़ैल गयीं|
"अरे तुम तो उनका जितना ख्याल रखती हो, उतना तो मैं भी नहीं रखता| लेकिन उनकी उदासी की वजह जानना जरुरी है, आज ही पूछता हूँ", कहकर वह ड्राइंग रूम में चल दिया| मिन्नी भी पीछे पीछे आयी और खड़ी हो गयी|
"क्या बात है पिताजी, आप आजकल थोड़े उदास लग रहे हैं? माँ की याद आ रही है क्या आजकल", उसने पिताजी के मन को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा|
पिताजी इस अचानक हुए सवाल से चौंक गए और संभलते हुए बोले "अभी तू थका मांदा ऑफिस से आ रहा है और ये सब क्या बात करने लगा| अरे बेटी तूने इसे पानी वानी दिया कि नहीं", बात टालने की गरज से पिताजी ने कहा|
"नहीं पिताजी, सच सच बताईये, पहले तो आप बहुत मजे में मुझसे बात करते थे लेकिन आजकल कुछ कम बात करते हैं| बेटी को भी नहीं बताएँगे आप?, मिन्नी ने भी पिताजी के पास बैठते हुए कहा|
"कोई बात नहीं है, अब इस बंगले में किसी चीज की कमी भी तो नहीं है, हर सुख सुविधा तो है यहाँ| बस ऐसे ही कभी कभी हो जाता है, अब उम्र भी तो हो चली मेरी", पिताजी ने स्नेह से मिन्नी के सर पर हाथ फेरा|
"तो फिर आप पहले जैसे खुश रहा कीजिये ना, हमारे लिए ही सही", मिन्नी ने एक बार फिर उनसे मनुहार किया|
"अरे तू चिंता मत कर, मैं बहुत खुश रहता हूँ| बस तू एक काम कर सकता है क्या, बंगले के पिछवाड़े का फर्श हटाकर वहां मिट्टी की एक क्यारी बनवा दे, मिट्टी से बहुत दूर हो गया हूँ आजकल", पिताजी ने जैसे कुछ याद करते हुए कहा|
अब उसे समझ में आ गया था, किसान पिता को मिट्टी से दूर करके वह कैसे खुश रख सकता है| उसने मिन्नी की तरफ देखा और दोनों मुस्कुरा पड़े|
पिताजी इन सबसे बेखबर दूर कहीं अपने गांव और खेतों में खो गए थे|
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