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Friday, September 22, 2017

जरुरत- लघुकथा

"सुबह मैंने शैम्पू लाने के लिए कहा था, फिर भूल गए", जैसे ही वह घर में घुसा, पत्नी बोली|
"एकदम दिमाग में ही नहीं आया, अच्छा कल जरूर लेता आऊंगा| छुटकी जगी नहीं अबतक", कहते हुए वह बैग रखकर कमरे में भागा| जैसे ही उसने जेब से चॉकलेट निकालकर उसके सिरहाने रखा, पत्नी ने नाराजगी दिखाते हुए कहा "बेटी के लिए चॉकलेट लाना नहीं भूले, लेकिन मेरा कहा याद नहीं रहा"|
"चाय पिलाओ ना, थोड़ी थकान लग रही है", उसने छुटकी के पास ही लेटते हुए कहा|
"ठीक है, पहले कपडे तो बदल लो", बोलती हुई पत्नी किचन में चली गयी| चाय पैन गैस पर चढ़ाकर जब पत्ती डालने चली तो याद आया कि चाय की पत्ती तो ख़त्म है|
ओह, सुबह ही सोचा था लेकिन दुकान पर ध्यान नहीं रहा| अब क्या करे सोचते हुए उसने आवाज़ लगायी "जरा चाय की पत्ती तो लेते आओ, ख़त्म हो गयी है"|
"कितनी भुलक्कड़ हो गयी हो आजकल, कुछ याद ही नहीं रहता बेटी के आगे", मुस्कुराते हुए उसने कहा|
"और तुम्हें सब याद रहता है", कहकर दोनों हंस पड़े|
"कुछ देर बाद ले आऊंगा चाय की पत्ती, अब थकान कम लग रही है", उसने बेटी के पास लेटे लेटे ही कहा| पत्नी भी आकर वहीँ बैठ गयी, दोनों की प्यार भरी निगाहें बेटी पर टिकी हुई थीं| 

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