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Friday, May 21, 2021

मदद--लघुकथा

 "गुरूजी, आपको बोला था ना कि अभी आप पैसे मत भेजिए, अभी काफी इकठ्ठा हो गया है",फोन पर हलकी नाराजगी से रोहन ने कहा.

"अरे तो क्या हुआ, अपने पास रख लो. जब जरुरत पड़े, तब इस्तेमाल कर लेना. वैसे भी मुझे कुछ मदद करनी ही थी, सो भेज दिया", उन्होंने गंभीरता से रोहन को समझाया.

"आप तो हमारे पथप्रदर्शक हैं और आप हमारी आखिरी उम्मीद भी हैं, जब कहीं से नहीं मिलेगा, तब तो आप देंगे ही गुरूजी. अभी तो हम इन पैसों से जरुरी मदद कर रहे हैं",रोहन की आवाज में मुलायमियत थी.

"ठीक है, आगे से नहीं भेजेंगे, अपना ध्यान भी रखना, हालात बहुत ख़राब हैं".

"आप इस समय कहीं और मदद कर दीजिये, हम जरुरत पर ले लेंगे. प्रणाम गुरूजी", रोहन ने कहते हुए फोन रख दिया.

उसी समय फोन पर मैसेज चमका, रोहन ने उनके द्वारा भेजे गए पैसे वापस कर दिए थे. गुरूजी के दिल में रोहन ने, जिसे एक बार फीस नहीं जमा करने पर उन्होंने क्लास से बाहर निकाल दिया था, बहुत बड़ी जगह बना ली थी.

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