" कब तक ऐसे बैठे रहेंगे आप , चलिए शाम हो गयी , अब नहीं आएगा वो " , लेकिन उनको सुनाई नहीं दिया कुछ | अब तो ये रोज़ की बात हो गयी थी , सुबह किसी तरह दो कौर मुंह में डाल लेना और फिर बस स्टैंड पर आकर बैठ जाना |
ऐसा क्या कह दिया था उन्होंने उस दिन , बस यही तो कहा था कि अब अपने खाने कमाने का इंतज़ाम करे | आखिर उम्र हो चली थी उनकी , और कौन बाप नहीं चाहता कि उसकी औलाद उसके हाँथ पांव चलने तक अपने काम धंधे से लग जाए |
महीनो बीत गए , लेकिन न तो वो आया , न उसकी कोई खबर | रोज़ का इंतज़ार , आज कुछ पता चले , लेकिन अब उन्हें ये लगने लगा था कि शायद वक़्त उनसे रूठ गया था |
उधर बेटा अलग परेशान था , क्या मुंह लेकर जाए वापस | चल तो दिया था आवेश में आकर , ये सोचकर कि कुछ बनकर ही लौटूंगा और कहूँगा " देख बापू , मैं कमाने खाने लगा हूँ , तू क्या सोचता था कि मैं निठल्ला ही रहूँगा "| लेकिन क्या कर पाया था वो यहाँ |
लेकिन आज की घटना ने उसे विचलित कर दिया | उसके पड़ोस में रहने वाले दम्पति , जिनके बच्चे विदेश में थे , ने ख़ुदकुशी कर ली थी | कहने को तो सब कुछ था , पर नहीं था तो बच्चों का साथ , अपनों का प्यार |
पूरी रात यही सब चलता रहा उसके दिमाग में , क्या करे , कहीं उसके माँ बापू भी ? इसके आगे नहीं सोच पाया वो , कुछ भी छोटा मोटा काम करेगा लेकिन माँ बापू को अकेला नहीं छोड़ेगा | और अगले दिन बस स्टैंड पर उसके बापू ने उसे अपने सीने से लगाया हुआ था | आंसुओं की बहती धार ने उनके बीच सब कुछ साफ़ कर दिया था |
ऐसा क्या कह दिया था उन्होंने उस दिन , बस यही तो कहा था कि अब अपने खाने कमाने का इंतज़ाम करे | आखिर उम्र हो चली थी उनकी , और कौन बाप नहीं चाहता कि उसकी औलाद उसके हाँथ पांव चलने तक अपने काम धंधे से लग जाए |
महीनो बीत गए , लेकिन न तो वो आया , न उसकी कोई खबर | रोज़ का इंतज़ार , आज कुछ पता चले , लेकिन अब उन्हें ये लगने लगा था कि शायद वक़्त उनसे रूठ गया था |
उधर बेटा अलग परेशान था , क्या मुंह लेकर जाए वापस | चल तो दिया था आवेश में आकर , ये सोचकर कि कुछ बनकर ही लौटूंगा और कहूँगा " देख बापू , मैं कमाने खाने लगा हूँ , तू क्या सोचता था कि मैं निठल्ला ही रहूँगा "| लेकिन क्या कर पाया था वो यहाँ |
लेकिन आज की घटना ने उसे विचलित कर दिया | उसके पड़ोस में रहने वाले दम्पति , जिनके बच्चे विदेश में थे , ने ख़ुदकुशी कर ली थी | कहने को तो सब कुछ था , पर नहीं था तो बच्चों का साथ , अपनों का प्यार |
पूरी रात यही सब चलता रहा उसके दिमाग में , क्या करे , कहीं उसके माँ बापू भी ? इसके आगे नहीं सोच पाया वो , कुछ भी छोटा मोटा काम करेगा लेकिन माँ बापू को अकेला नहीं छोड़ेगा | और अगले दिन बस स्टैंड पर उसके बापू ने उसे अपने सीने से लगाया हुआ था | आंसुओं की बहती धार ने उनके बीच सब कुछ साफ़ कर दिया था |
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