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Saturday, November 15, 2014

बाल दिवस पर--

क्यों हो गए हम इतने बड़े , 
क्यों भूल गए हम वो छोटी छोटी शैतानियाँ ,
क्यों नहीं सुनाता अब कोई परियों की कहानियां ,
आज फिर दिल मचल रहा है ,
कि खेलें आइस पाईस ,
खेलें बम तड़ी , नचाएँ अपने हाथों पर लट्टू ,
काश आ जाएँ वो दिन फिर से वापस ,
बन जाएँ फिर से हम बच्चे ,
खेल खेल में खूब लड़ें ,
क्यों हो गए हम इतने बड़े !!

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