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Wednesday, April 15, 2015

पाप --

आज फिर से बादल , मौसम को ई का हो गया है , रामदीन सोच में डूब गया | आधे से ज्यादी फसल तो पहले ही चौपट हो गयी है , ऊपर से अगर घाम न हुआ तो पकेगी कैसे बची खुची फसल | कुछ समझ नहीं आ रहा था उसको | थोड़ी देर बाद वो उठा और कुम्हार टोला की ओर निकल गया | वहां रघू भी अपने सर पर हाँथ रख कर बैठा था , उसे देखते ही बोला " अरे ई मौसम को का हो गवा है , एकदम समझ नहीं आवत है एकर मिज़ाज़ | बर्तन तो तैयार ही नहीं हो पावत हैं , कइसे दो जून की रोटी का इंतज़ाम होई "|
कोई जवाब नहीं था उसके पास , चुपचाप उठा और वापस खेत की ओर निकल पड़ा | पगडण्डी गीली थी और उससे ज्यादा गीला था उसका मन | कइसे होगा इस बार सबके लिए भोजन का इंतज़ाम , अगली फसल के लिए भी तो खाद , बीज लेना है | इन्ही विचारों से जूझता हुआ वो अपने खेत पहुंचा तो सन्न रह गया | एक बछिया उसके खेत में घुस के बची खुची फसल चबा रही थी | मन एकदम से क्रोध से भर गया उसका और पास पड़ी ईंट उठाकर उसने पूरी ताक़त से बछिया को मारा | ईंट सीधी उसके सर पर लगी और वो दो चार कदम दौड़ कर उसके खेत में ही गिर पड़ी | उसके गिरते ही रामदीन की चेतना जागी , वो भाग कर बछिया के पास पहुंचा , पर वो तो मुंह से खून उगलती मृतप्राय हो गयी थी |
अब क्या हो , गौ हत्या का पाप लग जायेगा उसके ऊपर | सर पकड़ कर वो बछिया के पास बैठ गया । अचानक बछिया ने आखिरी हिचकी ली और रामदीन उसको देखते हुए फफक कर रो पड़ा |  

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