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Tuesday, April 21, 2015

खुदगर्ज़--

श्मशान घाट से लौटते समय उसके कदम उठ ही नहीं रहे थे । काश उसने बेटी की बात मान ली होती तो शायद ये दिन नहीं आता । कौन सा उसने कोई अलग आसमां माँग लिया था , बस इतना ही तो कहा था कि वो किसी और से शादी करना चाहती है ।
लेकिन जब माँ ने उससे पिता की इज़्ज़त का हवाला दिया तो वो चुपचाप तैयार हो गयी । शायद वो कहीं बहुत ज्यादा प्यार करती थी ।
दहेज़ लोभियों ने उसे मौत के घाट उतार दिया और उसने कभी कुछ नहीं बताया । बेटी की अर्थी का बोझ तो उठा लिया उसने लेकिन अब अपने दिल का बोझ ?

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