" कहाँ चले आप इतना सज धज के , आज तो छुट्टी है न ऑफिस की ", जैसे ही उस्मानी साहब घर से निकलने को हुए , बेगम ने टोक दिया | एक बार तो बहुत जोर का गुस्सा आया उनको , कितनी बार मना किया है कि निकलते समय मत टोका करो , लेकिन आज बात न बढ़े इस वज़ह से टाल गए | बस आधे घंटे बचे थे पार्क पहुँचने के लिए | उनकी नयी सोशल फ्रेंड ने समय जो दिया था मिलने के लिए |
" कुछ नहीं बेगम , ज़रा यूँ ही टहलने जा रहा था | थोड़ी देर में आ जाऊंगा , कुछ लाना है तो बता दीजिये "|
" ठीक है , लेकिन जल्दी आइएगा ", बेगम ने अपनी मुस्कराहट दबाते हुए कहा |
इधर उस्मानी साहब घर से निकले , उधर बेगम और बेटी हँसते हँसते लोट पोट होने लगीं | उनके बिछाए जाल में फंस कर उनको आज की तारीख भी याद नहीं रही |
" कुछ नहीं बेगम , ज़रा यूँ ही टहलने जा रहा था | थोड़ी देर में आ जाऊंगा , कुछ लाना है तो बता दीजिये "|
" ठीक है , लेकिन जल्दी आइएगा ", बेगम ने अपनी मुस्कराहट दबाते हुए कहा |
इधर उस्मानी साहब घर से निकले , उधर बेगम और बेटी हँसते हँसते लोट पोट होने लगीं | उनके बिछाए जाल में फंस कर उनको आज की तारीख भी याद नहीं रही |
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