आज ही वह घर आया था और उसने सोच रखा था कि इस बार पिताजी को टोक देगा कि बार बार फोन मत किया करें| अब तो साथ के बच्चे भी उसे चिढाने लगे थे कि पता नहीं वह कब बड़ा होगा| बाकी बच्चे तो अपने पिता का कई बार फोन ही उठाते ही नहीं थे और बाद में एक छोटा सा मैसेज कर देते थे कि लाइब्रेरी में था|
नहा धोकर उसने फोन उठाया और जाकर पिता के सामने बैठ गया, पिताजी उस समय अखबार देख रहे थे| उसको आता देखकर उन्होंने अखबार रखा और उसको भरपूर निगाहों से देखने लगे| उसने बात शुरू करते हुए कहा "इस बार ठण्ड कुछ जल्दी ही शुरू हो गयी पिताजी?
पिताजी ने एक बार बाहर नजर डाली और हाँ में सर हिलाते हुए पूछा "स्वेटर वगैरह तो हैं ना काम भर के तुम्हारे पास, कुछ लेना हो तो शाम को चल के ले लेना"|
"मेरे पास काफी हैं, आप चिंता मत कीजिये, वहीं ले लिये थे मैंने| आप तो अपना ध्यान रखते हैं ना?, उसने फोन को हाथ में से रख दिया|
"खाना पीना ठीक से खाया कर और किसी भी चीज की जरुरत हुआ करे तो मुझे बता दिया कर| तेरी माँ होती तो सब कुछ वही देख लेती", पिताजी ने उसको प्यार से देखते हुए कहा|
अब बोल ही देता हूँ, सोचते हुए उसने कहा "पिताजी, आप बार बार फोन मत किया कीजिये, ठीक नहीं लगता है| मुझे कोई जरुरत होगी तो मैं आपको बोल दूंगा"| लेकिन दोस्त हंसी उड़ाते हैं, ये कह नहीं पाया|
पिताजी को जैसे झटका लगा और उन्होंने उसको देखते हुए धीरे से कहा "लेकिन मुझे जो जरुरत होती है तुम्हारे कुशल क्षेम की, उसके लिए क्या करूँ?, और वहां से चल दिए|
वह उठ कर पिताजी के पीछे पीछे उनके कमरे में गया| पिताजी ने अपने छोटे से संदूक में से एक पोस्टकार्ड निकाला और उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोले "आज सुविधा है तो मैं फोन कर लेता हूँ, पहले तो सिर्फ यही साधन था"|
उसने गौर से एक बार उस पुराने पोस्ट कार्ड को देखा और फिर पिताजी को, फिर धीरे से पिताजी का हाथ पकड़ लिया|
नहा धोकर उसने फोन उठाया और जाकर पिता के सामने बैठ गया, पिताजी उस समय अखबार देख रहे थे| उसको आता देखकर उन्होंने अखबार रखा और उसको भरपूर निगाहों से देखने लगे| उसने बात शुरू करते हुए कहा "इस बार ठण्ड कुछ जल्दी ही शुरू हो गयी पिताजी?
पिताजी ने एक बार बाहर नजर डाली और हाँ में सर हिलाते हुए पूछा "स्वेटर वगैरह तो हैं ना काम भर के तुम्हारे पास, कुछ लेना हो तो शाम को चल के ले लेना"|
"मेरे पास काफी हैं, आप चिंता मत कीजिये, वहीं ले लिये थे मैंने| आप तो अपना ध्यान रखते हैं ना?, उसने फोन को हाथ में से रख दिया|
"खाना पीना ठीक से खाया कर और किसी भी चीज की जरुरत हुआ करे तो मुझे बता दिया कर| तेरी माँ होती तो सब कुछ वही देख लेती", पिताजी ने उसको प्यार से देखते हुए कहा|
अब बोल ही देता हूँ, सोचते हुए उसने कहा "पिताजी, आप बार बार फोन मत किया कीजिये, ठीक नहीं लगता है| मुझे कोई जरुरत होगी तो मैं आपको बोल दूंगा"| लेकिन दोस्त हंसी उड़ाते हैं, ये कह नहीं पाया|
पिताजी को जैसे झटका लगा और उन्होंने उसको देखते हुए धीरे से कहा "लेकिन मुझे जो जरुरत होती है तुम्हारे कुशल क्षेम की, उसके लिए क्या करूँ?, और वहां से चल दिए|
वह उठ कर पिताजी के पीछे पीछे उनके कमरे में गया| पिताजी ने अपने छोटे से संदूक में से एक पोस्टकार्ड निकाला और उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोले "आज सुविधा है तो मैं फोन कर लेता हूँ, पहले तो सिर्फ यही साधन था"|
उसने गौर से एक बार उस पुराने पोस्ट कार्ड को देखा और फिर पिताजी को, फिर धीरे से पिताजी का हाथ पकड़ लिया|
No comments:
Post a Comment