सुखिया ने अपनी धोती को एक बार और कस के कमर में खोंसा और हंसुआ लेकर खेत की ओर चल दी| उसके साथ साथ उसके टोला की और भी कई महिलाएं खेत की तरफ जा रही थीं| धान तैयार था और कटाई जोरो से चल रही थी और रोज ही जल्दी घर से निकल कर खेतों में काम करने जाना आजकल दिनचर्या बन गयी थी| एक बार धान के रोपाई के समय इसी तरह से काम रहता था और अब धान के कटाई के समय| बुधिया ने आज अपना हंसिया तेज कर लिया था और सूरज की किरणों से वह चमक रहा था|
"आज तो बहुत जल्दी जल्दी काट लेगी बुधिया, एकदम चमचमाता हंसिया है तुम्हरा", सुखिया ने उसे छेड़ते हुए कहा|
"सो तो है लेकिन कहीं कउनो अउर भी आ गया तो उहो कट जायेगा आज", बुधिया ने भी चिकोटी ली|
जल्दी जल्दी कदम बढ़ाते हुए टोली जैसे ही गांव के बीच से निकल रही थी कि उनकी नज़र एक गाड़ी पर पड़ी| कुछ लोग जो देख कर ही शहरी लग रहे थे उस गाड़ी के अगल बगल खड़े थे और लग रहा था जैसे कोई बैठकी होने वाली हो| सुखिया के कदम उसको देखकर रुक गए, साथ साथ बाकी टोली भी ठिठक गयी| उनमें से एक आदमी के हाथ में माइक था औऱ पीछे एक कैमरा वाला भी था साथ में|
"इ सब तो टी वी में देखा है, कुछो पूछत हैं सबसे इ लोग", टोली में से किसी ने कहा|
"हाँ रे, देखा तो है इन लोगों को, लगत है आज इँहा भी कुछ पुछीहें इ लोग", अब सुखिया को भी याद आ गया| उनके टोला में भी कुछ लोगों के घर टी वी था औऱ कभी कभी उ देखने चली जाती थी|
उधर टी वी का एंकर वहां खड़े ठाकुर से कुछ पूछ रहा था औऱ कैमरा वाला सब तरफ कैमरा घुमा रहा था| टोली कौतुहल में कड़ी थी औऱ देख रही थी तभी किसी ने कहा "अरे छोड़ इ सब तमाशा, धान काटे में देर हो जाई, जल्दी चला सब लोग"|
लेकिन किसी के भी कदम आगे नहीं बढे, जीवन में पहली बार ऐसा सामने देखने को मिल रहा था| इतने में एंकर की नजर टोली पर पड़ी तो उसे लगा कि इनसे बात करने पर ज्यादा बढ़िया खबर बनेगी| उसने कैमरा वाले को इशारा किया औऱ दोनों इस टोली की तरफ बढ़े|
माइक वाले को अपनी तरफ आते देखकर टोली के लोग पीछे हटने लगे, कुछ तो खेतों की तरफ भागीं| उनको भागते देखकर एंकर ने उनको पुकारा "अरे रुकिए आप लोग, आप लोगों से भी कुछ पूछना है हमको"|
सुखिया खड़ी थी औऱ उसको देखकर बुधिया औऱ कुछ औऱ औरतें भी खड़ी हो गयीं| नजदीक पहुंचकर एंकर ने उनको समझाया कि वह कुछ सवाल उनसे पूछेगा औऱ अगर संभव हो तो जवाब दीजिये| सुखिया औऱ बुधिया ने सर हामीं में हिलाया तो एंकर उनकी तरफ बढ़ा| टोली की बाकी औरतें उनके पीछे सहमी सी खड़ी हो गयीं|
जैसे ही एंकर ने माइक बुधिया की तरफ बढ़ाया, उसने सबसे पहले अपना पल्लू ठीक किया औऱ माथे पर आये पसीने को पोंछ लिया| फिर उसे ध्यान आया कि उसका हंसिया तो हाथ में ही है तो वह उसको नीचे रखने लगी|
"अरे आप हंसिया हाथ में ही लिए रहिये, कोई दिक्कत नहीं है", एंकर के कहने पर बुधिया ने हंसिया वापस पकड़ लिया|
"खड़ी बोली में पूछे तो समझ जाएंगी ना आप| जवाब चाहे भोजपुरी में दे दीजियेगा", एंकर ने पूछा तो बुधिया ने सर हिला दिया| इतनी खड़ी बोली तो उसे समझ में आती थी, हाँ बोलने में जरूर दिक्कत थी| इस घबराहट में भी उसे एक चीज बहुत अच्छी लगी कि जिंदगी में पहली बार किसी ने उससे आप कहकर बात किया|
"आज तो बहुत जल्दी जल्दी काट लेगी बुधिया, एकदम चमचमाता हंसिया है तुम्हरा", सुखिया ने उसे छेड़ते हुए कहा|
"सो तो है लेकिन कहीं कउनो अउर भी आ गया तो उहो कट जायेगा आज", बुधिया ने भी चिकोटी ली|
जल्दी जल्दी कदम बढ़ाते हुए टोली जैसे ही गांव के बीच से निकल रही थी कि उनकी नज़र एक गाड़ी पर पड़ी| कुछ लोग जो देख कर ही शहरी लग रहे थे उस गाड़ी के अगल बगल खड़े थे और लग रहा था जैसे कोई बैठकी होने वाली हो| सुखिया के कदम उसको देखकर रुक गए, साथ साथ बाकी टोली भी ठिठक गयी| उनमें से एक आदमी के हाथ में माइक था औऱ पीछे एक कैमरा वाला भी था साथ में|
"इ सब तो टी वी में देखा है, कुछो पूछत हैं सबसे इ लोग", टोली में से किसी ने कहा|
"हाँ रे, देखा तो है इन लोगों को, लगत है आज इँहा भी कुछ पुछीहें इ लोग", अब सुखिया को भी याद आ गया| उनके टोला में भी कुछ लोगों के घर टी वी था औऱ कभी कभी उ देखने चली जाती थी|
उधर टी वी का एंकर वहां खड़े ठाकुर से कुछ पूछ रहा था औऱ कैमरा वाला सब तरफ कैमरा घुमा रहा था| टोली कौतुहल में कड़ी थी औऱ देख रही थी तभी किसी ने कहा "अरे छोड़ इ सब तमाशा, धान काटे में देर हो जाई, जल्दी चला सब लोग"|
लेकिन किसी के भी कदम आगे नहीं बढे, जीवन में पहली बार ऐसा सामने देखने को मिल रहा था| इतने में एंकर की नजर टोली पर पड़ी तो उसे लगा कि इनसे बात करने पर ज्यादा बढ़िया खबर बनेगी| उसने कैमरा वाले को इशारा किया औऱ दोनों इस टोली की तरफ बढ़े|
माइक वाले को अपनी तरफ आते देखकर टोली के लोग पीछे हटने लगे, कुछ तो खेतों की तरफ भागीं| उनको भागते देखकर एंकर ने उनको पुकारा "अरे रुकिए आप लोग, आप लोगों से भी कुछ पूछना है हमको"|
सुखिया खड़ी थी औऱ उसको देखकर बुधिया औऱ कुछ औऱ औरतें भी खड़ी हो गयीं| नजदीक पहुंचकर एंकर ने उनको समझाया कि वह कुछ सवाल उनसे पूछेगा औऱ अगर संभव हो तो जवाब दीजिये| सुखिया औऱ बुधिया ने सर हामीं में हिलाया तो एंकर उनकी तरफ बढ़ा| टोली की बाकी औरतें उनके पीछे सहमी सी खड़ी हो गयीं|
जैसे ही एंकर ने माइक बुधिया की तरफ बढ़ाया, उसने सबसे पहले अपना पल्लू ठीक किया औऱ माथे पर आये पसीने को पोंछ लिया| फिर उसे ध्यान आया कि उसका हंसिया तो हाथ में ही है तो वह उसको नीचे रखने लगी|
"अरे आप हंसिया हाथ में ही लिए रहिये, कोई दिक्कत नहीं है", एंकर के कहने पर बुधिया ने हंसिया वापस पकड़ लिया|
"खड़ी बोली में पूछे तो समझ जाएंगी ना आप| जवाब चाहे भोजपुरी में दे दीजियेगा", एंकर ने पूछा तो बुधिया ने सर हिला दिया| इतनी खड़ी बोली तो उसे समझ में आती थी, हाँ बोलने में जरूर दिक्कत थी| इस घबराहट में भी उसे एक चीज बहुत अच्छी लगी कि जिंदगी में पहली बार किसी ने उससे आप कहकर बात किया|
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