Translate

Wednesday, March 18, 2015

रिश्ता--

अब उसका दर्द बर्दाश्त की हद पार कर चुका था | डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया था इतनी भयानक दुर्घटना के बाद | लेकिन पत्नी हर पल परछाईं की तरह उसके आस पास मौजूद रहती थी |
उसकी आँख खुली तो उसने देखा कि वो बेड के पास कुर्सी पर सो रही थी | हल्की सी आहट पाते ही वो जग गयी | 
" अगर मुझे जाना ही है तो जाने क्यों नहीं देती , क्यों यमराज से लड़ रही हो " उसने फीकी मुस्कान के साथ कहा |
" मैं तुम्हारी ही तरह खुदगर्ज़ हूँ न ", और आंसुओं को रोकते हुए उसने मुंह घुमा लिया |

No comments:

Post a Comment