" बापू , हम लोग इन मकानों में क्यों नहीं रहते जिन्हें हम बनाते हैं ", उसके पुत्र ने पूछा |
" बेटा , हम इन्हें बनाते ही दूसरों के लिए हैं | इनसे हमारा रिश्ता सिर्फ इनके पूर्ण होने तक ही रहता है "|
पुत्र को ये रिश्ता समझ में नहीं आ रहा था पर पिता को भी श्रम और धन का रिश्ता कहाँ समझ आया था आज तक |
" बेटा , हम इन्हें बनाते ही दूसरों के लिए हैं | इनसे हमारा रिश्ता सिर्फ इनके पूर्ण होने तक ही रहता है "|
पुत्र को ये रिश्ता समझ में नहीं आ रहा था पर पिता को भी श्रम और धन का रिश्ता कहाँ समझ आया था आज तक |
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