जेल से रिहा होकर बहुत प्रसन्न था वो , कदम उसके उत्साह का साथ नहीं दे पा रहे थे | बस मन में एक ही इच्छा , कितनी जल्दी पहुंचे अपने घर , अपनों के बीच | लगभग भागते हुए अपने मोहल्ले में घुसा , नुक्कड़ की दुकान वाले चाचा ने जैसे अनदेखा कर दिया | उसे थोड़ा अजीब तो लगा लेकिन जल्दी जल्दी कदम बढ़ाते हुए वो घर की ओर लपका | अचानक उसके कान में आवाज़ आई " किसने सोचा था कि ये भी ये कर सकता है , कितना मासूम चेहरा और ऐसी घिनौनी हरक़त "|
मोहल्ले में जो भी उसे देखता , मुंह घुमा लेता था | घर के दरवाज़े पर पहुँच कर उसने सांकल बजाई और दरवाज़ा खुलते ही अंदर घुस गया | माँ की रुलाई फुट पड़ी थी और वो भी उसके साथ रो पड़ा | कुर्सी पर बैठे बैठे उसके दिमाग में पुरानी घटनाएँ घूमने लगीं | माँ का एकलौता पुत्र था वो और पिता जी बचपन में ही गुज़र गए थे | चाचा का भरा पूरा परिवार था और उनके चारो बच्चों को भी जायदाद में आधा हिस्सा ही मिलना था | जैसे जैसे वो बड़ा होता गया , चाचा की नफरत भी बढ़ती गयी | लेकिन उसे ये सब समझ नहीं आता था उस समय और वो अपने भाईयों के कमरे में बेधड़क घुस जाता था |
और एक दिन उसकी भाभी ने उसपर वो इलज़ाम लगा दिया जिसके बारे में वो सोच भी नहीं सकता था | घर में जम कर पीटा उसके भाईयों ने और फिर पुलिस केस | अगले तीन साल तक केस चलता रहा , जमानत भी नहीं मिली उसे | लेकिन आखिरकार उसे रिहाई मिल गयी क्योंकि उसका जुर्म साबित नहीं हो पाया | इस बीच बंटवारा हो गया , सब अच्छी जमीनें चाचा ने हथिया ली | घर भी अलग कर लिया और उसकी माँ को अकेले दिन बिताने के लिए छोड़ दिया | खेती बाड़ी सब उजड़ गयी और केस के चक्कर में आधी ज़मीने भी बिक गयीं जिसमें से कुछ तो चाचा ने ही खरीद लीं |
कब रात हो गयी और किसी तरह कुछ खा कर माँ बेटे सो गए | अगली सुबह वो घर से बाहर निकला , कोई उससे बात भी करने को तैयार नहीं था | हर निगाह जैसे उससे उसकी बेगुनाही का सबूत मांग रही थी | अदालत ने तो बरी कर दिया था लेकिन समाज ने अभी भी उसे बेगुनाह नहीं माना था |
मोहल्ले में जो भी उसे देखता , मुंह घुमा लेता था | घर के दरवाज़े पर पहुँच कर उसने सांकल बजाई और दरवाज़ा खुलते ही अंदर घुस गया | माँ की रुलाई फुट पड़ी थी और वो भी उसके साथ रो पड़ा | कुर्सी पर बैठे बैठे उसके दिमाग में पुरानी घटनाएँ घूमने लगीं | माँ का एकलौता पुत्र था वो और पिता जी बचपन में ही गुज़र गए थे | चाचा का भरा पूरा परिवार था और उनके चारो बच्चों को भी जायदाद में आधा हिस्सा ही मिलना था | जैसे जैसे वो बड़ा होता गया , चाचा की नफरत भी बढ़ती गयी | लेकिन उसे ये सब समझ नहीं आता था उस समय और वो अपने भाईयों के कमरे में बेधड़क घुस जाता था |
और एक दिन उसकी भाभी ने उसपर वो इलज़ाम लगा दिया जिसके बारे में वो सोच भी नहीं सकता था | घर में जम कर पीटा उसके भाईयों ने और फिर पुलिस केस | अगले तीन साल तक केस चलता रहा , जमानत भी नहीं मिली उसे | लेकिन आखिरकार उसे रिहाई मिल गयी क्योंकि उसका जुर्म साबित नहीं हो पाया | इस बीच बंटवारा हो गया , सब अच्छी जमीनें चाचा ने हथिया ली | घर भी अलग कर लिया और उसकी माँ को अकेले दिन बिताने के लिए छोड़ दिया | खेती बाड़ी सब उजड़ गयी और केस के चक्कर में आधी ज़मीने भी बिक गयीं जिसमें से कुछ तो चाचा ने ही खरीद लीं |
कब रात हो गयी और किसी तरह कुछ खा कर माँ बेटे सो गए | अगली सुबह वो घर से बाहर निकला , कोई उससे बात भी करने को तैयार नहीं था | हर निगाह जैसे उससे उसकी बेगुनाही का सबूत मांग रही थी | अदालत ने तो बरी कर दिया था लेकिन समाज ने अभी भी उसे बेगुनाह नहीं माना था |
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