थके क़दमों से वो ओल्ड ऐज होम के कमरे में आईने के सामने खड़ा हुआ | आज पहला दिन था उसका यहाँ और मन में जैसे दुखों का सैलाब भरा हुआ था | बेटे की तीखी आवाज़ उसके कानों में अभी भी गूंज रही थीं |
अचानक उसने देखा , आईने में उसके तीस साल पुराने चेहरे का अक्स नज़र आ रहा था |
अचानक उसने देखा , आईने में उसके तीस साल पुराने चेहरे का अक्स नज़र आ रहा था |
We are proud of our senior Generatios who have made us worth a human.
ReplyDeleteशुक्रिया अज़हर जी..
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