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Friday, March 20, 2015

रामलीला--

" बेटा , एक बार इच्छा है रामलीला देखने की , हो सके तो ." , माँ की बात पूरी भी नहीं हुई थी तभी उसने टोक दिया " क्या माँ , क्या रखा है इस घिसी पिटी रामलीला में , कितनी बार तो देख चुकी हो | मेरे पास टाइम नहीं है इन चीजों के लिए " कहते हुए वो घर से जल्दी में निकल गया |
शाम को बेटी ने बताया कि कल मूवी देखने चलना है , उसने टिकट बुक कर दिया है | उसने मुस्कुराते हुए हामी भर दी |
अगली शाम घर से निकलते समय उसने देखा कि माँ भी चल रही है | उसने आश्चर्य से बेटी की ओर देखा , बेटी के चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान झलक रही थी | जब बेटी ने कार रोकी तो उसने देखा सामने रामलीला का स्थान था | अब उसे बेटी के मुस्कान का अर्थ समझ में आया |
" अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता | तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई " , मंच पर से इस चौपाई की आवाज़ आ रही थी | रामलीला में डूबी हुई माँ की आँखों से ख़ुशी के आंसू गिर रहे थे और वो भी अपने मन में एक अजीब सा सुकून महसूस कर रहा था |  

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