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Sunday, March 29, 2015

परिवर्तन--

" क्या बात है ठाकुर साहब , आज आप हमारी बस्ती में ? 
सवाल सुनकर तो एक बार अचकचाए लेकिन संभलते हुए बोले " दुनियाँ कहाँ से कहाँ पहुँच गयी , अब ये ऊँच नीच की दीवार हमें गिरानी होगी भाई "| वहां मौजूद सभी खामोश हो गए , कुछ तो वाह वाह कर बैठे | 
उनके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी , लेकिन हरिया मन ही मन किसी हादसे की आशंका से काँप गया | अब उसकी बेटी भी जवान हो रही थी |

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