शाम गहरा रही थी, हर तरफ पटाखों का शोर सुनाई दे रहा था| शर्माजी बहुत पेशोपेश में थे, दिल कहता था कि उनको श्याम के घर जाना चाहिए लेकिन आज सुबह से घर में चलती बहस का नतीजा इसके खिलाफ था| गलती तो उसने भयानक की थी लेकिन अब उसकी सजा तो वह भुगत ही रहा था| सबसे ज्यादा विरोध तो पत्नी ही कर रही थी जिसके बहुत से छोटे मोटे काम श्याम की पत्नी कर दिया करती थी|
पिछले कई साल से जानते थे श्याम को शर्माजी, मोहल्ले के आखिर में ही वह रहता था| किसी तरह एक कमरे का आधा अधूरा घर बनवा लिया था उसने और अपनी बीबी और छोटी बच्ची के साथ रहता था| पहले तो किसी और की गाड़ी चलाता था लेकिन कुछ पैसे जमा हो गए तो एक पुरानी गाड़ी खरीद कर खुद ही चलाने लगा| वह खुद तो बहुत कम ही दिखता था लेकिन उसकी पत्नी और बच्ची उसके घर आते रहते थे| कभी कुछ ज्यादा शिकायत भी नहीं सुनाई पड़ी थी उसके बारे में लेकिन उस रात नशे की हालात में श्याम ने जघन्य अपराध कर डाला|
शर्माजी बेचैनी में घर के अंदर गए, पत्नी फोन पर अपनी विधवा सहेली से बात कर रही थी "अरे बच्चों को क्यों रोकती हो त्यौहार मनाने से, उनकी क्या गलती है| मैं आ रही हूँ तुम्हारे घर और बच्चों को यहाँ ले आऊँगी, तुम मना मत करना"|
फोन रखकर जैसे ही पत्नी उनकी तरफ मुड़ी, उन्होंने गहरी नज़र से देखा| उनकी नज़र में भी वही सवाल था, इसमें बच्चों की क्या गलती है, फिर मुझे क्यों रोक रही थी तुम|
पत्नी को बात समझ आ गयी और उसने मिठाई और पटाखे का एक डिब्बा लाकर उनके हाथ में देते हुए कहा "चलो जल्दी से श्याम के घर देते हुए निकल जाएंगे, आखिर बच्चों की क्या गलती है इसमें"|
पिछले कई साल से जानते थे श्याम को शर्माजी, मोहल्ले के आखिर में ही वह रहता था| किसी तरह एक कमरे का आधा अधूरा घर बनवा लिया था उसने और अपनी बीबी और छोटी बच्ची के साथ रहता था| पहले तो किसी और की गाड़ी चलाता था लेकिन कुछ पैसे जमा हो गए तो एक पुरानी गाड़ी खरीद कर खुद ही चलाने लगा| वह खुद तो बहुत कम ही दिखता था लेकिन उसकी पत्नी और बच्ची उसके घर आते रहते थे| कभी कुछ ज्यादा शिकायत भी नहीं सुनाई पड़ी थी उसके बारे में लेकिन उस रात नशे की हालात में श्याम ने जघन्य अपराध कर डाला|
शर्माजी बेचैनी में घर के अंदर गए, पत्नी फोन पर अपनी विधवा सहेली से बात कर रही थी "अरे बच्चों को क्यों रोकती हो त्यौहार मनाने से, उनकी क्या गलती है| मैं आ रही हूँ तुम्हारे घर और बच्चों को यहाँ ले आऊँगी, तुम मना मत करना"|
फोन रखकर जैसे ही पत्नी उनकी तरफ मुड़ी, उन्होंने गहरी नज़र से देखा| उनकी नज़र में भी वही सवाल था, इसमें बच्चों की क्या गलती है, फिर मुझे क्यों रोक रही थी तुम|
पत्नी को बात समझ आ गयी और उसने मिठाई और पटाखे का एक डिब्बा लाकर उनके हाथ में देते हुए कहा "चलो जल्दी से श्याम के घर देते हुए निकल जाएंगे, आखिर बच्चों की क्या गलती है इसमें"|
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