" नहीं डॉक्टर, मुझे ये दाग़ नहीं मिटवाने। कुछ गलतियाँ भूलनी नहीं चाहिए और खास कर ऐसी गलतियाँ", अपने चेहरे को आइने में देख कर एक बार तो वो खुद सिहर गयी थी लेकिन फिर उसने अपने आप को मजबूत किया। क्या किसी पर भरोसा करना गलती थी, शायद नहीं। लेकिन कुछ तो उसने भी गलती की ही थी।
रोज वो उसी स्टॉप से कॉलेज के लिए बस पकड़ती थी और वो उसको शायद कई महीनों से देखता था। खूबसूरत थी ही और उसकी तारीफ सुनकर समझ नहीं पायी और उसे अपना दोस्त समझ कर उससे सब कुछ साझा करने लगी। वो भी उसे हर चीज में प्रोत्साहित करता और उसे लगता कि एक सच्चा हमदर्द मिल गया है। एक दिन बातों बातों में ही उसने अपने प्यार का इज़हार कर दिया। उसने उसको समझाने की कोशिश की, अपने सपने के बारे में याद दिलाया जो उनका साझा सपना हुआ करता था। लेकिन अब उसका असली रंग सामने आने लगा और वो उसको इग्नोर करने लगी।
उसे याद आया उसका मैसेज " तुम अगर मेरी नहीं हुई तो मैं किसी और की होने लायक नहीं छोड़ूंगा "। उसे कुछ दिन डर तो लगा लेकिन फिर वो अपने सपने को पूरा करने में सब भूलती गयी। उसे देखकर भी अनदेखा करती और अपने काम में डूबती गयी। और फिर दो दिन पहले की घटना, बाइक बगल से गुजरी और जब तक कुछ समझती, उसका चेहरा एक तरफ से जलने लगा था।
एक बार फिर उसने अपना चेहरा आईने में देखा, अब वो दाग उसे कम डरावना लग रहा था। हाँ वो उसे अपने सपने को हर हाल में पूरा करने की हिम्मत जरूर दे रहा था। सामने टी वी पर विज्ञापन आ रहा था " दाग अच्छे हैं "।
रोज वो उसी स्टॉप से कॉलेज के लिए बस पकड़ती थी और वो उसको शायद कई महीनों से देखता था। खूबसूरत थी ही और उसकी तारीफ सुनकर समझ नहीं पायी और उसे अपना दोस्त समझ कर उससे सब कुछ साझा करने लगी। वो भी उसे हर चीज में प्रोत्साहित करता और उसे लगता कि एक सच्चा हमदर्द मिल गया है। एक दिन बातों बातों में ही उसने अपने प्यार का इज़हार कर दिया। उसने उसको समझाने की कोशिश की, अपने सपने के बारे में याद दिलाया जो उनका साझा सपना हुआ करता था। लेकिन अब उसका असली रंग सामने आने लगा और वो उसको इग्नोर करने लगी।
उसे याद आया उसका मैसेज " तुम अगर मेरी नहीं हुई तो मैं किसी और की होने लायक नहीं छोड़ूंगा "। उसे कुछ दिन डर तो लगा लेकिन फिर वो अपने सपने को पूरा करने में सब भूलती गयी। उसे देखकर भी अनदेखा करती और अपने काम में डूबती गयी। और फिर दो दिन पहले की घटना, बाइक बगल से गुजरी और जब तक कुछ समझती, उसका चेहरा एक तरफ से जलने लगा था।
एक बार फिर उसने अपना चेहरा आईने में देखा, अब वो दाग उसे कम डरावना लग रहा था। हाँ वो उसे अपने सपने को हर हाल में पूरा करने की हिम्मत जरूर दे रहा था। सामने टी वी पर विज्ञापन आ रहा था " दाग अच्छे हैं "।
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