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Monday, February 1, 2016

जीवन--

एक और धमाका कर चुका था वो और फिर से अपने खोल में छुप जाने के लिए निकल गया। इस बार भी कई जाने गयी थीं और काफी तबाही भी हुई थी, और उसे अगले आदेश तक छुप कर रहना था। क्यूँ कर रहा था वो ऐसा, किसलिए बेगुनाह इन्सानों का क़त्ल कर रहा था, उसे याद नहीं था। बस इतना पता था कि अपने धर्म के लिए उसे ये सब करना है।
उसका भी एक गाँव था, थोड़े खेत थे और वो अपने पिता के साथ संतुष्ट जीवन बिता रहा था। फिर माहौल बिगड़ने लगा और एक दिन उसके पिता की मौत की खबर उसे मिली। कुछ लोग घर आये और उसको बताया कि आतंकवादी होने के संदेह में उसके पिता को मार दिया गया है। फिर उन लोगों की आवाजाही बढ़ गयी और उसे पता भी नहीं चला कब वो उनके साथ इन वारदातों में शामिल हो गया।
अचानक उसकी नज़र दो बच्चों पर पड़ी जो बरसात में भी पेड़ों को पानी दे रहे थे। वो एकदम से ठिठक कर रुक गया, ये क्या कर रहा है वो। एकतरफ ये बच्चे हैं जो पेड़ों को भी जीवन दे रहे हैं, और दूसरी तरफ वो ?
अब वो भी बच्चों की तरफ बढ़ा और पानी देने मे हाथ बटाने लगा।

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