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Monday, February 22, 2016

एक छोटी सी घटना--

" क्या हालत हो गयी हैं अपने देश की, लोग देश के बारे में तो सोचते ही नहीं हैं आजकल ", बहुत आवेश में थी वो सवारी। तीखी धूप में रिक्शा खींचते हुए कमजोर रग्घू को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, बस पैर पैडल पर थे और मंजिल पर पहुँचाने की जल्दी थी।
" अबे थोड़ा तेज चला, क्या मरी हुई चाल से खींच रहे हो, जल्दी पहुँचना है मुझे। जब चला नहीं सकते तो क्यूँ बैठा लेते हो"।
अपनी बची खुची ताक़त लगा दी रग्घू ने, पसीना बहना थोड़ा और बढ़ गया। अचानक चक्कर सा आया और वो आगे की तरफ झुक गया और रिक्शा एकदम से बायें मुड़ा। जब तक बैठी हुई सवारी कुछ समझती, रिक्शा पलट गया और रग्घू भी एक तरफ गिर पड़ा। थोड़ी चोट सवारी को भी लगी और वो गाली देते हुए सड़क पर आ गयी।
उसने हाथ देकर एक दूसरा रिक्शा रोका और बैठ गया। उसका बड़बड़ाना जारी था " ये सब शराब पीकर चलाते हैं, जान ले लेता अभी "।
दूसरे रिक्शे वाले ने एक नज़र रग्घू पर डाली, थोड़ा दर्द हुआ उसको रग्घू के लिए लेकिन फिर उसका पैर पैडिल पर पड़ा। कुछ लोग रग्घू के आस पास जुट गए थे, लोग उसके नशे में होने के कयास लगा रहे थे। दूसरे रिक्शे वाले के शरीर से भी पसीना बहना शुरू हो गया था और सवारी फिर फोन पर किसी से हँसते हुए बात कर रही थी।

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