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Tuesday, February 16, 2016

उजालों की राह--

" ज़िद मत करो, वहाँ की सुकूनभरी दुनियाँ हमारा इन्तज़ार कर रही है। बहुत सहा है हमने और बहुत मेहनत की है इसे पाने के लिए, और जब सब कुछ मिल रहा है तो ऐसी बचकानी जिद्द मत करो", उसने समझाते हुए कहा।
" हाँ, बहुत सहा है हमने इसीलिए बाक़ी अपनों को यही सब सहने के लिए छोड़ जाएँ यहाँ। अपने लिए ही सिर्फ कुछ हासिल कर लेना सब कुछ नहीं होता, जितना पाया है हमने उससे कई गुना लौटाने की जिम्मेदारी भी तो हमारी ही है", सपना ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा।
वो भी सोच में पड़ गया, एक तरफ सारी सहूलियतें और दूसरी तरफ इन टूटे अधखुले दरवाजे वाला उसका गाँव और उसके अपने लोग।
" वो सामने वाले घर को देख रहे हो, कुछ रोशनी वहाँ भी आनी चाहिए थी। लेकिन उस घर का नौजवान भी शायद तुम्हारी तरह ही सोचता था और छोड़ गया सारे अँधेरे यहीं पर अपने अधूरे उजाले की तलाश में। खुद की रौशनी से दूसरों को प्रकाश देने वाले ही सूरज कहलाते हैं"।
वो एकटक सपना की ओर देख रहा था, उसकी सोच का दरवाज़ा भी धीरे धीरे खुलने लगा था।

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