उड़ान-1
एक बार फिर
क़तर दिए गए थे उसके पर
एक बाए फिर
उसने की थी कोशिश
छूने की आसमान
सुन लिया था उसने
कि होता है इस जहाँ में
उनका भी एक दिन
और जा रही थी वो
खुद को तलाशने,
पर अब पड़ी थी
एक सरकारी हस्पताल में
एक टूटे, बदबूदार बिस्तर पर
अपने लहूलुहान आत्मा के साथ !!
-----------------------------------------------
उड़ान-२
कभी बोये थे जो खेतों में
सपनो के बीज
और सोचा था
एक दिन उगेगी फसल,
लेकिन पता नहीं था
करनी पड़ती है
दिन रात रखवाली
बचाना पड़ता है
उसे जानवरों से
ऐसे जानवर
जो अलग नहीं दिखते
अपनों से ही होते हैं
और उजाड़ देते हैं
सपनो जैसी फसल को
--------------------------------------------------
उड़ान-३
कल देखा था
एक छोटे से चिड़े को
जो लड़खड़ा रहा था
चलने की कोशिश में
और आज देखा
कि वो उड़ गया
नीले गगन में
उसके पंखों में
भर दिए थे हौसले
उसकी माँ ने
और अब उसे भय नहीं है
किसी भी उड़ान से
किसी भी आसमान से
-------------------------------------
उड़ान-४
मन के आसमान में
विचारों की बदली
उमड़ रही है,
सोचा था कि
कल जरूर होगा
अपनों का साथ
और बीतेंगे खुशनुमा पल
पर पता ही नहीं चला
कब हो गए बच्चे इतने बड़े
और कर लिया उन्होंने फैसला
जिसमें दखल दे सकने की
कोई गुन्जाईस नहीं रही !!
------------------------------------------
उड़ान-५
कदम कदम पर
सवालों के बोझ तले
उसने सीखा आगे बढ़ना
आसान नहीं थी मंजिल
उबड़ खाबड़ थे रास्ते
पर हर सांस जैसे तैयार थी
सहने को बगावत के स्वर
और निगाहें थी सिर्फ
अपनी मंज़िल की ओर
समय खुद ब खुद बनाता गया
रास्ता अंधेरों के बीच से
और पा ली मंज़िल उसने
जो कभी लगती थी
नामुमकिन सी !!
एक बार फिर
क़तर दिए गए थे उसके पर
एक बाए फिर
उसने की थी कोशिश
छूने की आसमान
सुन लिया था उसने
कि होता है इस जहाँ में
उनका भी एक दिन
और जा रही थी वो
खुद को तलाशने,
पर अब पड़ी थी
एक सरकारी हस्पताल में
एक टूटे, बदबूदार बिस्तर पर
अपने लहूलुहान आत्मा के साथ !!
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उड़ान-२
कभी बोये थे जो खेतों में
सपनो के बीज
और सोचा था
एक दिन उगेगी फसल,
लेकिन पता नहीं था
करनी पड़ती है
दिन रात रखवाली
बचाना पड़ता है
उसे जानवरों से
ऐसे जानवर
जो अलग नहीं दिखते
अपनों से ही होते हैं
और उजाड़ देते हैं
सपनो जैसी फसल को
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उड़ान-३
कल देखा था
एक छोटे से चिड़े को
जो लड़खड़ा रहा था
चलने की कोशिश में
और आज देखा
कि वो उड़ गया
नीले गगन में
उसके पंखों में
भर दिए थे हौसले
उसकी माँ ने
और अब उसे भय नहीं है
किसी भी उड़ान से
किसी भी आसमान से
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उड़ान-४
मन के आसमान में
विचारों की बदली
उमड़ रही है,
सोचा था कि
कल जरूर होगा
अपनों का साथ
और बीतेंगे खुशनुमा पल
पर पता ही नहीं चला
कब हो गए बच्चे इतने बड़े
और कर लिया उन्होंने फैसला
जिसमें दखल दे सकने की
कोई गुन्जाईस नहीं रही !!
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उड़ान-५
कदम कदम पर
सवालों के बोझ तले
उसने सीखा आगे बढ़ना
आसान नहीं थी मंजिल
उबड़ खाबड़ थे रास्ते
पर हर सांस जैसे तैयार थी
सहने को बगावत के स्वर
और निगाहें थी सिर्फ
अपनी मंज़िल की ओर
समय खुद ब खुद बनाता गया
रास्ता अंधेरों के बीच से
और पा ली मंज़िल उसने
जो कभी लगती थी
नामुमकिन सी !!
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