" तो तुम तैयार हो मेरी बेटी को अपने घर में क़ुबूल करने के लिए ", उसने उसकी आँखों में उम्मीद के साथ देखा।
" मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है, लेकिन क्या तुम्हारी बेटी ये जानती है ", उसने अपनी चिर परिचित मुस्कराहट फेंकते हुए कहा।
" मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है, मेरे कहे को नहीं टालेगी वो। पर तुम्हारा बेटा तो मान जायेगा ना "।
" हाँ, बिलकुल, उसे तो मेरी ख़ुशी में ही उसकी ख़ुशी दिखती है "।
अब एक सन्नाटा पसर गया था दोनों के बीच में। दोनों ही सोच रहे थे कि काश उनके माँ बाप ने भी इसी तरह सोचा होता और उनका धर्म उनके बीच में नहीं आया होता।
फिर दोनों ने एक बार फिर एक दूसरे का हाथ पकड़ा और मुस्कुरा कर भविष्य की कल्पना में डूब गए। उनके मन बिलकुल युवाओँ की तरह उछल रहे थे, आखिर उनके बच्चे जो एक होने जा रहे थे।
और उनकी इन बातों से बेख़बर उनके बच्चे आज फिर से उस नृत्य नाटिका में भाग लेने जा रहे थे, जिसकी वज़ह से ही उनके माँ बाप भी कभी एक दूसरे के इतने क़रीब आये थे।
" मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है, लेकिन क्या तुम्हारी बेटी ये जानती है ", उसने अपनी चिर परिचित मुस्कराहट फेंकते हुए कहा।
" मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है, मेरे कहे को नहीं टालेगी वो। पर तुम्हारा बेटा तो मान जायेगा ना "।
" हाँ, बिलकुल, उसे तो मेरी ख़ुशी में ही उसकी ख़ुशी दिखती है "।
अब एक सन्नाटा पसर गया था दोनों के बीच में। दोनों ही सोच रहे थे कि काश उनके माँ बाप ने भी इसी तरह सोचा होता और उनका धर्म उनके बीच में नहीं आया होता।
फिर दोनों ने एक बार फिर एक दूसरे का हाथ पकड़ा और मुस्कुरा कर भविष्य की कल्पना में डूब गए। उनके मन बिलकुल युवाओँ की तरह उछल रहे थे, आखिर उनके बच्चे जो एक होने जा रहे थे।
और उनकी इन बातों से बेख़बर उनके बच्चे आज फिर से उस नृत्य नाटिका में भाग लेने जा रहे थे, जिसकी वज़ह से ही उनके माँ बाप भी कभी एक दूसरे के इतने क़रीब आये थे।
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