और आज वापस हिन्दुस्तान की फ्लाइट पकड़ने के लिए वो चल पड़ा। पिछली बार शायद ६ साल पहले गया था और एक अप्रवासी की तरह समय बिताकर वापस आ गया था। एक हफ़्ते था वो अपने घर लेकिन उस एक हफ्ते में भी उसने माँ बाप के पास बैठने का समय नहीं निकाला था। एक डर था उसके अन्दर कि पता नहीं क्या मांग लें उससे।
एक दशक पहले उसकी कम्पनी ने भेज था उसे सात समन्दर पार इस देश में। उसके अपने सपनों की जैसे मंजिल मिल गयी थी और उसके माँ बाप को भी एक गर्व की अनुभूति हुई थी। शुरुवात में तो वह लगातार फोन करता, पैसे भेजता और अपनी तरफ से उनका पूरा ख्याल रखने की कोशिश करता। फिर कुछ सालों का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के पहले ही उसने अपनी कम्पनी से इस्तीफा देकर एक स्थानीय कम्पनी में ज्वाइन कर लिया। वहीँ उसकी मुलाक़ात हुई सबरीना से और धीरे धीरे ये मुलाक़ात प्यार में बदल गयी। माँ पिता लगातार शादी के लिए दबाव बना रहे थे और बहुत से रिश्ते भी देख रखे थे उन्होंने, लेकिन अपनी स्थिति को देखते हुए उसने सबरीना से शादी कर ली। अब उसे इस देश में स्थायी रूप से रहने का आधार मिल गया था और उसने फोन पर माँ पिता को सूचना देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी।
अगले कुछ सालों में दोनों के बीच का फ़र्क़ उभरने लगा, सबरीना का खुलापन अब उसे नागवार गुजरने लगा। फिर वो दिन भी आ गया जब सबरीना ने उसे बता दिया कि अब उसके घर में, जो उसके ही पैसों से ख़रीदा हुआ था, में उसके लिए कोई जगह नहीं है। अगले दिन सबरीना का मित्र घर में रहने आ गया और उसे अपना बैग लेकर घर छोड़ना पड़ा।
चलते समय भी उसे उम्मीद थी कि शायद सबरीना उसे रोक ले लेकिन उसकी उम्मीद धुंध में तब्दील हो गयी। अब उसे अपने देश और अपने माँ पिता की पुकार सुनाई दे रही थी।
एक दशक पहले उसकी कम्पनी ने भेज था उसे सात समन्दर पार इस देश में। उसके अपने सपनों की जैसे मंजिल मिल गयी थी और उसके माँ बाप को भी एक गर्व की अनुभूति हुई थी। शुरुवात में तो वह लगातार फोन करता, पैसे भेजता और अपनी तरफ से उनका पूरा ख्याल रखने की कोशिश करता। फिर कुछ सालों का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के पहले ही उसने अपनी कम्पनी से इस्तीफा देकर एक स्थानीय कम्पनी में ज्वाइन कर लिया। वहीँ उसकी मुलाक़ात हुई सबरीना से और धीरे धीरे ये मुलाक़ात प्यार में बदल गयी। माँ पिता लगातार शादी के लिए दबाव बना रहे थे और बहुत से रिश्ते भी देख रखे थे उन्होंने, लेकिन अपनी स्थिति को देखते हुए उसने सबरीना से शादी कर ली। अब उसे इस देश में स्थायी रूप से रहने का आधार मिल गया था और उसने फोन पर माँ पिता को सूचना देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी।
अगले कुछ सालों में दोनों के बीच का फ़र्क़ उभरने लगा, सबरीना का खुलापन अब उसे नागवार गुजरने लगा। फिर वो दिन भी आ गया जब सबरीना ने उसे बता दिया कि अब उसके घर में, जो उसके ही पैसों से ख़रीदा हुआ था, में उसके लिए कोई जगह नहीं है। अगले दिन सबरीना का मित्र घर में रहने आ गया और उसे अपना बैग लेकर घर छोड़ना पड़ा।
चलते समय भी उसे उम्मीद थी कि शायद सबरीना उसे रोक ले लेकिन उसकी उम्मीद धुंध में तब्दील हो गयी। अब उसे अपने देश और अपने माँ पिता की पुकार सुनाई दे रही थी।
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