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Thursday, April 28, 2016

अपराधबोध--

कितनी ही बार वो अपने हाथ धोता लेकिन उसे लगता जैसे लहू अभी भी उसकी हथेलियों में चिपका हुआ है| कैसे भुलाए वो उस मनहूस रात को, पर गलती तो उसकी भी नहीं थी| रात के अँधेरे में उसे पता ही नहीं चला कि सामने वाला कौन है| उसने कई बार चेतावनी दी, लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया और वो साया भागता रहा तो उसे गोली चलानी पड़ी|
पूरा शहर जल रहा था और लगता था जैसे लोगों की समझ भी उसी आग में जल गयी हो| हर घंटे पता चलता कि इस इलाके में आगजनी हुई, वहां गोली चली और उस कोने में कुछ लोग मार डाले गए| लगातार चौथा दिन था जब वो जग रहा था, नींद और थकान से बदन टूट रहा था लेकिन न तो उसे इज़ाज़त थी और न ही मौका था कि कुछ घंटे सो पाये| रात के लगभग ९ बजे थे जब उसे दूर एक साया भागता हुआ नज़र आया| अँधेरा बहुत था और उसने कई बार आवाज़ लगायी कि रुक जाओ लेकिन वो साया नहीं रुका|
उसने अपनी स्टेनगन उठाई और दौड़ पड़ा उसके पीछे| ऐसा लग रहा था जैसे वो साया बहुत छोटा हो, फिर नींद के असर के चलते उसे ठीक से समझ नहीं आया| शायद वो अपने को बचाने के लिए झुक कर भाग रहा हो, बस यही समझ में आया था उसके और फिर उसने एक बार और चेतावनी दी उसको रुकने के लिए|
उसी समय बगल की गली में एक विस्फोट हुआ और उसकी निगाह एक बार उस गली की तरफ चली गयी| हल्का सा भय भी लगा उसे कि कहीं कोई उसकी तरफ न गोली चला दे और फिर उसने उसी भय में सामने भागते साये को देखा और गोली चला दी| एक हलकी सी चीख की आवाज़ सुनाई दी उसे और वो साया ढेर हो गया| सावधानी से कदम बढ़ाते हुए वो उसकी तरफ बढ़ा और नज़दीक पहुँच कर जब उसने गौर से देखा तो उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी| उसके सामने एक १०-१२ साल का लड़का लुढ़का पड़ा था जिसके हाथ में एक ब्रेड का पैकेट था| उसने उसे उठाया और उस लड़के के सर से बहता लहू उसके हाथ से होते हुए उसके शरीर पर टपकने लगा| उसने लड़के के बेजान जिस्म को उठाकर बगल के फुटपाथ पर डाल दिया और थके क़दमों से वापस चल दिया|
उस रात के बाद कई बार उसने अपनी स्टेनगन को अपने सर पर रख कर गोली चलानी चाही लेकिन हर बार अपने बच्चों के चेहरे सामने आ जाते| उसके हाथों किसी और बच्चे का खून हो गया था, ये ख्याल उसे हर रात बेचैन करता और फिर उसे लगता जैसे उसके हाथ उस बच्चे के खून से सने हुए हैं|  

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