" दिमाग ख़राब हो गया था इनका, अरे कैसे दे दें दान! बस यही बच गया था कि अब समाज भी थू थू करे हम पर", बड़ा बेटा बड़बड़ाते हुए घूम रहा था| वो एक कोने में बैठी हुई थी, खामोश, एकटक पति के पार्थिव शरीर को निहारते हुए| बाहर मेडिकल कॉलेज की गाड़ी खड़ी थी और वो लोग पेशोपेश में थे|
पिछले कई महीनों से तबियत ख़राब चल रही थी उनकी और किसी तरह वो उनको सरकारी हस्पताल ले जाती थी| फायदा तो कुछ नहीं होता था, हाँ तसल्ली जरूर मिल जाती थी और कुछ देर बाहर निकलने से थोड़ी ताज़गी भी मिल जाती थी| घर में तो कोने का कमरा, जिसमे धूप और हवा भी कायदे से नहीं आती थी, ही उन दोनों का ठिकाना था| खाने के समय कर्कस आवाज़ में उनको पुकारा जाता तो खाने की इच्छा भी लगभग ख़त्म हो जाती थी|
छोटे ने भी बड़े की हाँ में हाँ मिलायी और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगा| वहां मौजूद लोग भी बेटों के साथ थे और किसी ने भी उससे या मेडिकल कॉलेज के लोगों से पूछना उचित नहीं समझा| आस पड़ोस की महिलाएं भी अब शव को स्नान करवाकर अंतिम संस्कार की तैयारी में लग गयीं| पंडितजी ने सामान की लिस्ट पकड़ाई और अपनी तैयारी में लग गए|
इतने में वो खड़ी हुई और कांपते स्वर में बोली " अगर इनकी इच्छा अपना शरीर दान करने की थी तो इसमें तुम लोगों को क्या दिक्कत है| समाज की परवाह तो खूब की है तुम लोगों ने और आगे भी करोगे ही| मैंने भी इनके साथ अपना शरीर दान कर दिया था और हो सके तो मेरे जाने के बाद भी तुम लोग यही करना", और वो बाहर खड़े मेडिकल कॉलेज के लोगों को बुलाने निकल गयी|
पिछले कई महीनों से तबियत ख़राब चल रही थी उनकी और किसी तरह वो उनको सरकारी हस्पताल ले जाती थी| फायदा तो कुछ नहीं होता था, हाँ तसल्ली जरूर मिल जाती थी और कुछ देर बाहर निकलने से थोड़ी ताज़गी भी मिल जाती थी| घर में तो कोने का कमरा, जिसमे धूप और हवा भी कायदे से नहीं आती थी, ही उन दोनों का ठिकाना था| खाने के समय कर्कस आवाज़ में उनको पुकारा जाता तो खाने की इच्छा भी लगभग ख़त्म हो जाती थी|
छोटे ने भी बड़े की हाँ में हाँ मिलायी और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगा| वहां मौजूद लोग भी बेटों के साथ थे और किसी ने भी उससे या मेडिकल कॉलेज के लोगों से पूछना उचित नहीं समझा| आस पड़ोस की महिलाएं भी अब शव को स्नान करवाकर अंतिम संस्कार की तैयारी में लग गयीं| पंडितजी ने सामान की लिस्ट पकड़ाई और अपनी तैयारी में लग गए|
इतने में वो खड़ी हुई और कांपते स्वर में बोली " अगर इनकी इच्छा अपना शरीर दान करने की थी तो इसमें तुम लोगों को क्या दिक्कत है| समाज की परवाह तो खूब की है तुम लोगों ने और आगे भी करोगे ही| मैंने भी इनके साथ अपना शरीर दान कर दिया था और हो सके तो मेरे जाने के बाद भी तुम लोग यही करना", और वो बाहर खड़े मेडिकल कॉलेज के लोगों को बुलाने निकल गयी|
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