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Wednesday, January 21, 2015

मुक्ति--

फिर आधी रात को उनकी आँख खुल गयी , पसीने से तरबतर वो बिस्तर से उठे और गटागट एक लोटा पानी हलक में उड़ेल दिया | ये सपना उन्हें पिछले कई सालों से परेशान कर रहा था | अक्सर वो देखते कि एक पंजा उनकी ओर बढ़ रहा है और जैसे ही वह उनके गर्दन के पास पहुँचता , घबराहट में उनकी नींद खुल जाती |
अब वो जिंदगी के आखिरी पड़ाव में पहुंच गए थे और अब काफी समय था उनके पास | रिटायरमेंट के बाद वो और पत्नी ही रहते थे घर में , बच्चे अपने अपने जगह व्यस्त थे | पत्नी भी परेशान रहती थी उनकी इस हालत से और कई बार पूछती थी कि क्यों इस तरह उठ जाते हैं वो | लेकिन कैसे बताते वो उसको , ये राज़ पिछले ४० सालों से अपने सीने में दफ़न कर रखा था उन्होंने |
अपने स्नातक के आखिरी साल में थे वो और उनका प्रेम परवान चढ़ रहा था | साथ जीने मरने के वादे कर लिए थे दोनों ने और एक रात मर्यादा की सीमा भी लाँघ गए | फिर फाइनल परीक्षाएं शुरू हुई और अगले दो महीनों तक वो ज्यादा मिल नहीं पाये थे | परीक्षा के बाद घर जाने की तैयारी हो गयी और वो ये कहने गए थे कि लौट के आने के बाद नौकरी और फिर शादी | लेकिन जैसे ही उसने बताया कि वो माँ बनने वाली है और जल्दी ही उन्हें शादी करनी पड़ेगी तो वो चिंतित हो गए |
गाँव पहुँचने पर पता चला कि दादाजी अपनी आखिरी सांस गिन रहे हैं और उनकी अंतिम इच्छा उसकी शादी देखने की थी | फिर पिताजी ने आनन फानन में शादी की तारीख पक्की की और जब तक वो कुछ कहते , शादी के फेरे हो गए | चाह कर भी कुछ नहीं कह सके किसी से और छ महीने बाद उन्हें खबर मिली कि उसने आत्महत्या कर लिया |
आज उन्होंने फैसला कर लिया था कि वो पत्नी को सब कुछ सच सच बता देंगे और शायद इस सपने से मुक्ति पा जायेंगे | पत्नी के संभावित प्रतिक्रिया के बारे में सोचते सोचते उनकी आँख लग गयी |

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