गांव में तनाव का माहौल था , लोग सशंकित थे किसी अनहोनी की आशंका से | हमीदा की गाय रात से गायब थी , तरह तरह की बाते हो रहीं थीं चारो तरफ | हमीदा खुद बहुत परेशान थी कि कहाँ चली गयी वो | जिंदगी में वो एक ही सहारा थी और अब वो भी नहीं मिल रही थी |
गांव में एक किनारे हमीदा का झोपड़ा था | पति शादी के दो साल बाद ही गुजर गया और कोई औलाद भी नहीं थी | अब अकेले की जिंदगी काटने के लिए उसने मायके से एक बछिया को लाकर पालना शुरू कर दिया | जैसे जैसे वो बड़ी होती गयी , हमीदा और व्यस्त होती चली गयी उसके साथ | पुरे गांव में उसका आना जाना था , सब लोगों के साथ उसका रिश्ता था , कोई चाचा , कोई ताऊ , कोई भैया तो कोई मौसी | उसे कभी महसूस ही नहीं हुआ था कि वो किसी और धर्म की है | अपने त्यौहार वो उतने मन से नहीं मनाती थी जितने गांव वालों के त्यौहार | धीरे धीरे बछिया बड़ी होकर एक दुधारू गाय बन गयी और वो उसका दूध लोगों के घर देने लगी | जो भी मिल जाता , उसके गुज़ारे के लिए काफी था | गाय के लिए चारा किसी के भी खेत से ले लेती और बदले में उसके यहाँ दूध पहुंचा देती |
फिर उसकी गाय ने एक बछिया को जन्म दिया | अब दो जनों के चारे की जरुरत पड़ने लगी जो कठिन था तो उसने सोचा कि क्यों न इस बछिया को किसी को दे दिया जाए | उसने अपने पड़ोसी जीतू को वो बछिया देने का फैसला कर लिया | गांव के साहूकार को जब पता चला कि जीतू को बछिया मिल गयी है तो उसके सीने पर सांप लोट गया | उस बछिया को वो लेने के बारे में सोच चुका था क्योंकि उसकी गाय बूढी हो गयी थी और दूध की जरुरत उसके बड़े परिवार को थी | अब वो किसी भी तरीके से उसे पाने की तरकीब सोचने लगा | सबसे पहले उसके गुर्गे जीतू के पास ये सन्देश लेकर गए कि वो बछिया साहूकार के यहाँ पहुंचा दे लेकिन उसने इंकार कर दिया | जब हमीदा को पता चला कि उसकी बछिया के चलते जीतू को धमकी मिल रही है तो उसने खुद साहूकार से बात करने का सोचा और उसके घर चली गयी | उसने गुज़ारिश करते हुए कहा कि इस बार तो जीतू को दी दिया है , अगली बछिया वो उसी को देगी |
गांव में अब तनाव का माहौल बनने लगा था | दुर्भाग्य से अगली बार हमीदा के गाय ने बछड़ा दे दिया | अब दिक्कत काफी बढ़ गयी थी , साहूकार इसे इज़्ज़त की बात बना चुका था और जीतू उसे बछिया देने को तैयार नहीं था | गांव का सौहार्दपूर्ण माहौल अब विषैला हो चला था |
अचानक लोगों में ये बात फैलने लगी कि हमीदा का धर्म अलग है | जिस बात को आजतक किसी ने सोचा भी नहीं था वो उनके जेहन में घर करने लगी | पता नहीं कौन ये ख़बरें फैला रहा था लेकिन अब लोग हमीदा से दूध लेने में आनाकानी करने लगे | किसी ने ये भी खबर उड़ा दी थी कि हमीदा के धर्म में तो लोग गाय का मांस खाते हैं और एक दिन इसकी गाय भी कटने के लिए चली जायेगी |
अब हमीदा बहुत परेशान रहने लगी थी , उसकी गाय के लिए उसे चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा था | दूध भी बहुत घरों में नहीं दे पा रही थी और कई लोग उससे मुंह चुराने लगे थे | साहूकार के लोगों का आतंक अलग था , कोई उनसे उलझने को तैयार नहीं था | लेकिन अभी भी कुछ लोगों को हमीदा से हमदर्दी थी , उसको वो लोग गलत नहीं समझते थे लेकिन सबके सामने चुप रहते थे |
फिर एक सुबह हमीदा की आँख खुली तो उसे अपनी गाय के रम्भाने की आवाज नहीं सुनाई दी | उसने बाहर निकालकर देखा तो उसके दरवाजे से गाय नदारद थी | वो पागलों की तरह उसे पुरे गांव में ढूढ़ने लगी , लेकिन उसका कहीं भी पता नहीं था | साहूकार के गुर्गों ने खबर उड़ा दी कि हमीदा ने गाय को कटने के लिए बेंच दिया |
पुरे दिन तरह तरह की अफवाहें उड़ती रहीं , कभी सुनने में आता कि गाय मिल गयी , कभी कोई कहता कि फलां बूचड़खाने में बेंच दी गयी | दिन बीता , रात आई , हमीदा के मुंह में पानी भी नहीं गया था | अगली सुबह लोगों ने देखा , हमीदा इस दुनिया को अलविदा कह गयी थी | घरवाले की जुदाई तो सह गयी लेकिन शायद अपनी गाय से जुदाई सह नहीं पायी |
गांव में एक किनारे हमीदा का झोपड़ा था | पति शादी के दो साल बाद ही गुजर गया और कोई औलाद भी नहीं थी | अब अकेले की जिंदगी काटने के लिए उसने मायके से एक बछिया को लाकर पालना शुरू कर दिया | जैसे जैसे वो बड़ी होती गयी , हमीदा और व्यस्त होती चली गयी उसके साथ | पुरे गांव में उसका आना जाना था , सब लोगों के साथ उसका रिश्ता था , कोई चाचा , कोई ताऊ , कोई भैया तो कोई मौसी | उसे कभी महसूस ही नहीं हुआ था कि वो किसी और धर्म की है | अपने त्यौहार वो उतने मन से नहीं मनाती थी जितने गांव वालों के त्यौहार | धीरे धीरे बछिया बड़ी होकर एक दुधारू गाय बन गयी और वो उसका दूध लोगों के घर देने लगी | जो भी मिल जाता , उसके गुज़ारे के लिए काफी था | गाय के लिए चारा किसी के भी खेत से ले लेती और बदले में उसके यहाँ दूध पहुंचा देती |
फिर उसकी गाय ने एक बछिया को जन्म दिया | अब दो जनों के चारे की जरुरत पड़ने लगी जो कठिन था तो उसने सोचा कि क्यों न इस बछिया को किसी को दे दिया जाए | उसने अपने पड़ोसी जीतू को वो बछिया देने का फैसला कर लिया | गांव के साहूकार को जब पता चला कि जीतू को बछिया मिल गयी है तो उसके सीने पर सांप लोट गया | उस बछिया को वो लेने के बारे में सोच चुका था क्योंकि उसकी गाय बूढी हो गयी थी और दूध की जरुरत उसके बड़े परिवार को थी | अब वो किसी भी तरीके से उसे पाने की तरकीब सोचने लगा | सबसे पहले उसके गुर्गे जीतू के पास ये सन्देश लेकर गए कि वो बछिया साहूकार के यहाँ पहुंचा दे लेकिन उसने इंकार कर दिया | जब हमीदा को पता चला कि उसकी बछिया के चलते जीतू को धमकी मिल रही है तो उसने खुद साहूकार से बात करने का सोचा और उसके घर चली गयी | उसने गुज़ारिश करते हुए कहा कि इस बार तो जीतू को दी दिया है , अगली बछिया वो उसी को देगी |
गांव में अब तनाव का माहौल बनने लगा था | दुर्भाग्य से अगली बार हमीदा के गाय ने बछड़ा दे दिया | अब दिक्कत काफी बढ़ गयी थी , साहूकार इसे इज़्ज़त की बात बना चुका था और जीतू उसे बछिया देने को तैयार नहीं था | गांव का सौहार्दपूर्ण माहौल अब विषैला हो चला था |
अचानक लोगों में ये बात फैलने लगी कि हमीदा का धर्म अलग है | जिस बात को आजतक किसी ने सोचा भी नहीं था वो उनके जेहन में घर करने लगी | पता नहीं कौन ये ख़बरें फैला रहा था लेकिन अब लोग हमीदा से दूध लेने में आनाकानी करने लगे | किसी ने ये भी खबर उड़ा दी थी कि हमीदा के धर्म में तो लोग गाय का मांस खाते हैं और एक दिन इसकी गाय भी कटने के लिए चली जायेगी |
अब हमीदा बहुत परेशान रहने लगी थी , उसकी गाय के लिए उसे चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा था | दूध भी बहुत घरों में नहीं दे पा रही थी और कई लोग उससे मुंह चुराने लगे थे | साहूकार के लोगों का आतंक अलग था , कोई उनसे उलझने को तैयार नहीं था | लेकिन अभी भी कुछ लोगों को हमीदा से हमदर्दी थी , उसको वो लोग गलत नहीं समझते थे लेकिन सबके सामने चुप रहते थे |
फिर एक सुबह हमीदा की आँख खुली तो उसे अपनी गाय के रम्भाने की आवाज नहीं सुनाई दी | उसने बाहर निकालकर देखा तो उसके दरवाजे से गाय नदारद थी | वो पागलों की तरह उसे पुरे गांव में ढूढ़ने लगी , लेकिन उसका कहीं भी पता नहीं था | साहूकार के गुर्गों ने खबर उड़ा दी कि हमीदा ने गाय को कटने के लिए बेंच दिया |
पुरे दिन तरह तरह की अफवाहें उड़ती रहीं , कभी सुनने में आता कि गाय मिल गयी , कभी कोई कहता कि फलां बूचड़खाने में बेंच दी गयी | दिन बीता , रात आई , हमीदा के मुंह में पानी भी नहीं गया था | अगली सुबह लोगों ने देखा , हमीदा इस दुनिया को अलविदा कह गयी थी | घरवाले की जुदाई तो सह गयी लेकिन शायद अपनी गाय से जुदाई सह नहीं पायी |
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