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Friday, February 20, 2015

समानता--

" किन्नर भी हम जैसे ही तो हैं , जरुरत है उन्हें समाज का अभिन्न अंग बनाने की | हम सब को इसके लिए सम्मिलित प्रयास करना होगा "| उद्घाटन भाषण समाप्त करके मंत्रीजी ने घड़ी की तरफ देखा और स्टेज से उतर गए | सुरक्षा दस्ते ने उनको भींड से बचाकर पंडाल से बाहर निकाला और पसीना पोंछते वो कार में बैठने लगे |
" साहब , मेरे बच्चे को बचा लीजिये , उसे किन्नर जबरदस्ती उठा ले गए हैं " |
" इसमें मैं क्या कर सकता हूँ " कहते हुए एक नज़र उन्होंने उसकी तरफ देखा और गार्ड को इशारा किया | नीचे गिरे उस व्यक्ति के जेहन में मंत्री जी का कहा " किन्नर भी हम जैसे ही तो हैं " घूम रहा था | कार धूल उड़ाते हुए निकल गयी और स्टेज से किन्नर समाज के अन्य वक्ताओं की आवाज़ गूंज रही थी |

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